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हिंदी सेवी सम्मान 2008-09

राष्ट्रपति भवन में हिंदी सेवी सम्मान

राष्ट्रपति भवन के अशोक हॉल में 20 जून 2012 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय की स्वायत्त इकाई केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा सन्‌ 2008 और सन्‌ 2009 के लिए विदेश से चुने गये हिंदी सेवियों को एक भव्य समारोह में सम्मानित किया गया। सम्मानित लोगों को शॉल और प्रशस्ति पत्र के साथ एक-एक लाख रुपये के चैक भेंट किये गए।

सन्‌ 2008 के लिए गिरीश कर्नाड, श्याम बेनेगल, प्रो. माधुरी छेड़ा, बल्ली सिंह चीमा (गंगाशरण सिंह पुरस्कार), पंकज पचौरी, विनोद अग्निहोत्री (गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार), प्रो. यशपाल, मुहम्मद ख़लील (आत्माराम पुरस्कार), नंदकिशोर आचार्य, विजय बहादुर सिंह (सुब्रह्मण्यम भारती पुरस्कार), प्रो. गोपाल राय, डॉ. विमलेश कांति वर्मा (महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार), हरमन वान ओल्फ़न (डॉ. जॉर्ज ग्रियर्सन पुरस्कार) तथा श्रीमती पूर्णिमा वर्मन को पद्मभूषण डॉ. मोटूरि सत्यनारायण पुरस्कार प्रदान कर राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटील ने सम्मानित किया।


इसी तरह सन्‌ 2009 के लिए संस्थान की ओर से प्रो. वाई. लक्ष्मी प्रसाद, मधुर भंडारकर, डॉ. दामोदर खडसे, प्रो. चमनलाल सप्रू (गंगाशरण सिंह पुरस्कार), ब्रजमोहन बख़्शी, बलराम (गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार), सुभाष लखेड़ा, डॉ. नरेंद्र के. सहगल (आत्माराम पुरस्कार), अजित कुमार, गोपाल चतुर्वेदी (सुब्रह्मण्यम भारती पुरस्कार), प्रो. डॉ. विक्रम सिंह (महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार), प्रो. ली जंग हो (डॉ. जॉर्ज ग्रियर्सन पुरस्कार) तथा डॉ. सुरेंद्र गंभीर को पद्मभूषण डॉ. मोटूरि सत्यनारायण पुरस्कार राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटील के हाथों प्रदान कर सम्मानित किया गया।


सम्मान समारोह में मानव संसाधन विकास मंत्री तथा संस्थान के अध्यक्ष कपिल सिब्बल, संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. अशोक चक्रधर, केंद्रीय राज्य मंत्री पुरंदेश्वरी देवी, संस्थान के निदेशक प्रो. मोहन, दीपक वोहरा, लक्ष्मीशंकर वाजपेयी, विजयकुमार मल्होत्रा, देव स्वरूप, अनंतकुमार सिंह, गिरिराजशरण अग्रवाल, बागेश्वरी तथा महेश भारद्वाज आदि सैंकड़ों सुधीजन उपस्थित थे। प्रधानमंत्री के साथ विदेश यात्रा पर गये पंकज पचौरी तथा विनोद अग्निहोत्री उपस्थित नहीं हो सके। विमलेश कांति वर्मा एक परियोजना के तहत बाहर हैं। इन्हें बाद में पुरस्कार दिये जायेंगे।

दूरदर्शन ने किया सीधा प्रसारण

केंद्रीय हिंदी संस्थान के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ, जब राष्ट्रपति भवन में हुए हिंदी सेवी सम्मान समारोह का सीधा प्रसारण दूरदर्शन ने किया। ज्ञातव्य है कि केंद्रीय हिंदी संस्थान का मुख्यालय आगरा में है, जिसके आठ केंद्र- दिल्ली, हैदराबाद, मैसूर, गुवाहाटी, शिलांग, दीमापुर, भुवनेश्वर और अहमदाबाद में कार्यरत हैं। भारत की एकता की एक महत्वपूर्ण कड़ी हमारी हिंदी है और आधुनिक भारत के लिए राष्ट्रीय एकता सबसे बड़ा मूल्य है, जिसे ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने केद्रीय हिंदी संस्थान की स्थापना की, जो हिंदी के साथ अन्य भारतीय भाषाओं के तुलनात्मक अध्ययन को प्रोत्साहित करते हुए दूसरे संस्थानों से मिलकर भी कई काम करता है। प्रतिवर्ष हिंदी सेवियों को फेलोशिप और पुरस्कार भी दिए जाते हैं।

बधाई एवं प्रतिक्रियाएँ

सम्मानितों की सूची देखकर अच्छा लगा -वेदप्रताप वैदिक (प्रख्यात समाजसेवी और चिंतक-पत्रकार)

प्रख्यात समाजसेवी और चिंतक-पत्रकार वेद प्रताप वैदिक ने इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में मुलाकात होने पर सन्‌ 2008-2009 के लिए सम्मानित हिंदी सेवियों की सूची देखकर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रो. अशोक चक्रधर की टीम ने सम्मानित करने के लिए जिन लोगों का चयन किया है, वे सब अपने अपने क्षेत्र के लब्ध-प्रतिष्ठित लोग हैं। ऐसे लोगों को सम्मानित होते हुए देखकर मन को अच्छा लगा और भरोसा हुआ कि न्याय--विवेक अभी खत्म नहीं हुआ है। अन्य संस्थाओं को भी चुपचाप काम करने वाले लोगों को इसी तरह सम्मानित करना चाहिए।

केंद्रीय हिंदी संस्थान को अशोक चक्रधर ने एक बार फिर से जीवंत और जागृत कर दिया है -सुधीश पचौरी (प्रख्यात आलोचक)

प्रख्यात आलोचक और मीडिया विशेषज्ञ प्रो. सुधीश पचौरी भी सम्मानित हुए लोगों की सूची देखकर बोले कि चार साल से मृतप्राय पड़े केंद्रीय हिंदी संस्थान को अशोक चक्रधर ने एक बार फिर से जीवंत और जागृत कर दिया है, लेकिन कुछ विघ्न संतोषी उनके भी पीछे पड़ गये हैं। अजीब बात है कि किसी संस्थान में कोई काम न हो तो लोगों को तकलीफ़ नहीं होती, लेकिन कोई काम करने के लिए आगे बढ़े तो लोगों के पेट में दर्द शुरू हो जाता है और वे उसे हतोत्साहित करने में लग जाते हैं, लेकिन अशोक चक्रधर को डटे रहकर अपना काम करते रहना चाहिए।

सम्मानित हिंदी सेवी विद्वानों की सूची

हिंदी सेवी सम्मान 2008-09 चित्र वीथिका