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दिल्ली केंद्र के नये भवन का उद्घाटन

दिल्ली केंद्र के नये भवन का उद्घाटन एवं संस्थान की नई वेबसाइट का लोकार्पण

25 अगस्त, 2012, केंद्रीय हिंदी संस्थान, दिल्ली केंद्र
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“जब तक हमारे कार्यालय अपने कामकाज में आम आदमी की बोलचाल की सरल भाषा यानी हिंदुस्तानी का इस्तेमाल नहीं करेंगे, तब तक हिंदी का भला नहीं होगा।”, यह मानना है माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री और केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के अध्यक्ष श्री कपिल सिब्बल का। केंद्रीय हिंदी संस्थान के दिल्ली केंद्र के नए भवन के उद्घाटन, संस्थान की नई वेबसाइट के लोकार्पण, हिंदी विद्वानों के सम्मान एवं दिल्ली केंद्र पर संचालित होने वाले अंतरराष्ट्रीय हिंदी शिक्षण पाठ्यक्रम का शुभारंभ करने के लिए आयोजित समारोह में वरिष्ठ हिंदी विद्वानों, मीडियाजनों, प्राध्यापकों और हिंदी सीखने आए विदेशी विद्यार्थियों से भरे सभागार से मुखातिब होते हुए श्री सिब्बल ने कहा कि हमें हिंदी को आज और आने वाले कल के लिहाज से जीवंत और समर्थ बनाने के लिए की जरूरत है। इस काम में उन संस्थाओं से सहयोग करना चाहिए जिनके पास हिंदी में काम का तकनीकी ज्ञान और कौशल है। अकेले दम पर हिंदी का इतना बड़ा नॉलेज स्पेस तैयार करने वाले भारतकोश के आदित्य चौधरी आपके साथ है। संस्थान को इनके अनुभव का लाभ लेना चाहिए। इन्हें अपने साथ जोड़ना चाहिए।”

kapil-sibbal-and-ashok-chakradhar संस्थान की नई वेबसाइट का लोकार्पण करते हुए उन्होंने कहा, “संस्थान की वेबसाइट का उद्धाटन ऐतिहासिक अवसर है, किसी भी संस्थान की हिंदी में इतनी अच्छी वेबसाइट अब तक नहीं बनी है। हिंदी और संस्थान की प्रगति की दिशा में यह एक बड़ा क़दम है पर संस्थान को आगे भी बहुत कुछ करना है। जल्द ही भारत दुनिया का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश होगा और हिंदी दुनिया की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा। आज दुनिया भर के लोग कई कारणों से हिंदी सीखना चाहते है। संस्थान को आगे बढ़कर उनकी मदद करनी चाहिए। हमें अपनी हिंदी के ऐसे सॉफ्टवेयर विकसित करने होंगे, जिनकी मदद से हिंदी सीखने की इच्छा रखने वाला कोई भी व्यक्ति दो से चार हफ़्ते में हिंदी पढ़ना सीख सके। 

हमारे बच्चों पर स्कूली बस्तों का भारी बोझ है। इसको कम करने के लिए भारत सरकार ने आकाश टैबलेट लॉन्च किया है। यदि हमारी टैक्स्ट बुक इलेक्ट्रॉनिक रूप में आकाश पर आ जाएँ तो छात्रों के बस्तों का बोझ कम होगा। आकाश पर बच्चों को न केवल पाठ मिलें बल्कि उन पाठों से जुड़ी उपयोगी जानकारी मल्टीमीडिया फ़ॉर्मेट में टैबलेट पर आए।

promod-sharma हमें हिंदी सिखाने वाले ई-लर्निंग सॉफ़्टवेयर मल्टीमीडिया कार्यक्रम भी तैयार करने होंगे. इसके लिए संस्थान में एक विशेषज्ञ टीम बननी चाहिए। ‘निकष’ (National & International Knowledge Accreditation Standards for Hindi) संस्थान की एक उम्दा और दूरगामी योजना है। हिंदी भाषा पढ़ने वाले विद्यार्थियों के भाषा-ज्ञान को यदि अंतरराष्ट्रीय मानक स्तर पर परखने के लिए ‘निकष’ जैसी योजना आगे बढ़ेगी तो हिंदी का भविष्य उज्ज्वल होगा। ” 

मंत्री जी ने यह भी कहा कि संस्थान को चाहिए कि वह हिंदी को आम आदमी के रोज़ग़ार और दस्तकारी से जोड़ने वाले पाठ्यक्रमों का प्रारूप बनाए। ऑप्टिकल फ़ाइबर के ज़रिए भारत के दूर दराज गाँवों तक ई-गवर्नेंस और विभिन्न जन-सुविधाओं को आम आदमी तक उसकी भाषा में पहुँचाना भारत सरकार की एक बड़ी महत्वपूर्ण योजना है, जिसमें संस्थान की भागीदारी होनी चाहिए। ”

कार्यक्रम की शुरुआत में माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री एवं मंडल के अध्यक्ष महोदय का स्वागत करते हुए संस्थान के निदेशक प्रो. मोहन ने कहा, “ इस समारोह के माध्यम से आज एक साथ चार बड़े कार्य होने जा रहे हैं। इस लिहाज से आज का दिन संस्थान के इतिहास में महत्वपूर्ण है। हिंदी सबको जोड़ने वाली भाषा है। अखिल भारत की संपर्क भाषा और अंतरराष्ट्रीय संवाद की उभरती हुई भाषा के रूप में हिंदी के कंधों पर बड़ी ज़िम्मेदारी है। अन्य भाषा के रूप में हिंदी शिक्षण-प्रशिक्षण और उससे जुड़ी प्रविधियों का अनुसंधान एवं विकास संस्थान का दायित्व है जिसका संस्थान निरंतर निर्वाह कर रहा है। ”

वेबसाइट लोकार्पण एवं हिंदी सेवी सम्मान

 उद्घाटन समारोह वीथिका देखें