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अंतरराष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग की राष्ट्रीय संगोष्ठी 2016

“हिंदी भाषा शिक्षण : विदेशी विद्यार्थियों के संदर्भ में”
(दिनांकः 18-19 मार्च 2016)

केंद्रीय हिंदी संस्थान के अंतरराष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन संस्थान के नज़ीर सभागार में हुआ।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में जी.एल.ए. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दुर्ग सिंह चौहान उपस्थित थे। इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होनें बताया कि मनुष्य में सीखने की असीम सम्भावनायें होती है और हमारे इमोशन भाषा सीखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विकता की भावना हमारे मन मे होनी चाहिये, हम अपने रीति-रिवाजों से जुड़े रहें तभी हम अपनी भाषाओं का भी विकास कर पायेंगे।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के भाषा विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. रमेश चन्द्र शर्मा तथा विदेश स्थित भारतीय सांस्कृतिक केंद्र के कार्यक्रम निदेशक श्री संजय वेदी तथा ओस्लो,नार्वे में हिंदी की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘स्पाईल दर्पण’ के संपादक श्री सुरेश चन्द्र शुक्ल उपस्थित थे।

संगोष्ठी के परिप्रेश्य में अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रो. रमेश चन्द्र शर्मा ने इस संगोष्ठी की महत्ता पर विचार व्यक्त करते हुए भाषा शिक्षण की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला।

श्री संजय वेदी ने विदेशों में हिंदी शिक्षण और प्रचार-प्रसार संबंधी विभिन्न प्रशासनिक एवं शैक्षिणिक अपेक्षाओं और स्थितियों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि विदेशों में हिंदी शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए टीचिंग मैटेरियल नवीन टैक्नोलॉजी पर आधारित हो तभी छात्रों में एक नई भाषा सीखने की रूचि पैदा होगी। उन्होनें ऑनलाईन हिंदी टीचिंग और अनुवाद जैसे विषयों के लिए विशेष पाठ्यक्रम आयोजित करने का सुझाव सामने रखा।

श्री सुरेश चन्द्र शुक्ल ने समृद्ध हिंदी साहित्य के जरिये हिंदी को लोकप्रिय बनाने की बात की। इस संदर्भ में उन्होंने पाठ्यक्रम से इतर विविध साहित्य को भी सिखाने की बात की।
संगोष्ठी के अध्यक्ष एवं संस्थान के निदेशक प्रो. नंद किशोर पाण्डेय जी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में संस्थान द्वारा विदेशी विद्यार्थियों को दिये जाने वाले हिंदी शिक्षण की समृद्ध परम्परा से परिचित कराते हुए इस बात पर जोर दिया कि हम आधुनिक समय और परिवेश के अनुसार हिंदी शिक्षण को नये रूप में ढालें। उन्होनें कहा कि यह संस्थान की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वह हिंदी भाषा शिक्षण के लिए मानक एवं श्रेष्ठ पाठ्यक्रम और शिक्षण तकनीकी विकसित करे।

विभागाध्यक्ष डॉ. गंगाधर वानोडे ने संगोष्ठी में पधारे गणमान्य अतिथियों और विद्वज्जनों का स्वागत कर संगोष्ठी का परिचय सभा के समक्ष रखा। कार्यक्रम का संचालन तथा धन्यवाद ज्ञापन श्रीमती शालिनी श्रीवास्तव ने किया।

इस अवसर पर संस्थान के विभिन्न विभागों को शैक्षिक सदस्यों एवं विद्यार्थियों के साथ-साथ देश के कई विश्वविद्यालयों से आये प्रोफेसर, संस्थान के पूर्व प्रोफेसरगण उपस्थित थे जिनमें प्रो. अश्वनी श्रीवास्तव, प्रो. चतुर्भुज सहाय, प्रो. वशिनी शर्मा, प्रो. मीरा सरीन, प्रो. भरत सिंह, डॉ. अपर्णा सारस्वत, डॉ. रेखा द्विवेदी, डॉ. आरती दुबे, डॉ. आनंद राय, प्रो. हरिशंकर, प्रो. देवेन्द्र शुक्ल, प्रो. वीना शर्मा, डॉ. ज्योत्स्ना रघुवंशी, डॉ. राजवीर सिंह, डॉ. सपना गुप्ता, डॉ. जोगेन्द्र सिंह मीणा, डॉ. के.जी. कपूर, डॉ. रामलाल वर्मा, श्रीमती प्रीति गुप्ता, श्रीमती रश्मि सिंह, श्री केशरी नंदन, श्री अनुपम श्रीवास्तव, श्री ऋषि माथुर एवं कुलसचिव डॉ. चंद्रकांत त्रिपाठी की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।