शनिवार, दिस 05

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केंद्रीय हिंदी संस्थान हैदराबाद के नवनिर्मित भवन के उद्घाटन के अवसर पर केंद्रीय हिंदी संस्थान के सभी उपस्थित सभी अधिकारीगण, कर्मचारीगण, उस क्षेत्र की संपूर्ण उपस्थित जनता, हमारे साथ जुड़े हमारे राज्यमंत्री श्री धोत्रे जी, तेलंगाना सरकार के मंत्री मल्ला रेड्डी जी, जिनका अभी हमको मार्गदर्शन मिला। हमारे सांसद रेवंत रेड्डी जी, सचिव अमित खरे जी, हमारे छावनी विधायक जी. सयाना जी, केंद्रीय हिंदी संस्थान के यशस्वी उपाध्यक्ष श्री अनिल शर्मा जोशी जी, केंद्रीय हिंदी संस्थान की निदेशक प्रो. बीना जी और यहाँ पर सभी उपस्थित हिंदी शिक्षण मंडल के सदस्यगण !
मुझे लगता है कि हम सब एक अच्छे काम के लिए इस विकट स्थिति में एकत्र हुए हैं जबकि कोरोना से पूरी दुनिया संकट से गुजर रही है। ऐसे वक्त में भी हम सब लोग ऐसे भवन के उद्घाटन के लिए यहाँ पर एकत्रित हैं। जो हिंदी के लिए समर्पित हैं जो भारत की भाषाओं उनके उत्थान की दिशा में महत्वपूर्ण हिंदी के लिए काम करने वाले लोग और हिंदी को सीखने वाले, पढ़ने, पढ़ाने वाले और उसके साहित्य में रुचि रखने वाले हिंदी का वैभव पूरी दुनिया में विकसित करने वाले, ऐसे सभी लोग आज देश और दुनिया के इस अवसर पर हमारे साथ जुड़े हुए हैं। मैं उन सभी लोगों का अभिवादन करता हूँ, सम्मान कर रहा हूँ।

मुझे इस बात की खुशी है कि तेलंगाना गर्वमेंट ने एक अच्छे संस्थान के लिए जमीन उपलब्ध कराई और भारत सरकार के तत्कालीन शिक्षा राज्य मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तत्कालीन मंत्री ने उसका शिलान्यास किया जो बहुत विद्वान आदमी हैं और उसके बाद आज 2018 के बाद पूरे 2 वर्ष से पहले ही हम लोकार्पण के लिए एकत्रित हुए हैं। यह बहुत कम होता है कि 2 साल में संस्थान कोई निर्माण कार्य पूरा कर दे।

हमारे लिए बहुत सुखद क्षण है। यह श्रेय मैं हैदराबाद केंद्र को, इस संस्थान के उपाध्यक्ष जी को सब लोगों को बधाई देता हूँ। शुभकामना देता हूँ और बधाई भी देता हूँ कि आप बहुत अच्छे समय पर आपने किया है।

माननीय मंत्री रेड्डी जी जो श्रम रोजगार और महिला बाल विकास मंत्री हैं और समझ सकते हैं, महिला कल्याण के भी हैं। मुझे लगता है कि उनके द्वारा पहले बताया गया कि शिलान्यास में उस समय वे थे। माननीय मुख्यमंत्री जी भी यहाँ थे और मुझे लगता है कि कोई हिंदी के लिए बड़े संस्थान की प्रतीक्षा तेलंगाना मुख्यमंत्री जी से कर रहे हैं ताकि वो हमारे बीच रहें आ सकें। तो मैं रेड्डी जी से कहूँगा कि मेरी ओर से मुख्यमंत्री जी को तेलंगाना के मुख्यमंत्री जी को बधाई दीजिएगा, शुभकामना दीजिएगा और इस अच्छे संस्थान के अच्छे लोगों को साधुवाद दीजिएगा कि आप जिस रुचि से देखता हूँ तेलंगाना में आप बहुत अच्छे तरीके से हिंदी का प्रचार-प्रसार हुआ है और ये जो केंद्र है हैदराबाद का यहाँ से हिंदी को लेकर बाहर जा रहे हैं देश के विभिन्न कोनों में जब मुझे इस राज्य के अच्छी हिंदी बोलते हुए लोग मिलते हैं तो मुझे बहुत खुशी होती है तो मैं बोलता हूँ। इतनी अच्छी हिंदी बोल रहे हैं तो वो बताते हैं कि हमारा केंद्र है और हर वर्ष हजारों लोग हिंदी की परीक्षाओं को भी देते हैं। मुझे लगता है कि उस विजन को, गांधी के उस मिशन को, गांधी के उस सपने को साकार कर रहे हैं जिसमें देश आजादी के बाद जो गांधी जी ने पहले सोचा था।

इस देश में हमारी जो 22 संविधान में बहुत खूबसूरत में जो बाइस भारतीय भाषाएँ हैं तमिल है, तेलुगु है, मलयालम है, कन्नड़ है, गुजराती है, मराठी है, बंगाली है, ओड़िया है, संस्कृत है, हिंदी है, उर्दू है, पंजाबी है, असमिया है ये हमारी जो बाइस बहुत सुंदरतम् भारत की भाषाएँ हैं जो संविधान के अनुच्छेद अनुसूची 8 में हमको प्राप्त हैं। इन बाइस की बाइस भाषाओं को और सशक्त करने का हमको काम करना है और इसके बीच में संपर्क के रूप में एक सौहार्द के रूप में हिंदी को एक लड़ी के रूप में सबको जोड़ने का जो महत्वपूर्ण काम हमारे देश आजादी से पहले गांधी ने किया था, भीमराव अंबेडकर ने दिया था और जिसमें संविधान में उल्लेख भी रहा कि हिंदी को राजभाषा का दर्जा देकर के और हिंदी की सशक्तता के लिए ये जो भारत की बाइस भारतीय भाषाएँ हैं यदि जरूरत पड़ती है तो उनके से भी शब्दों को लेकर के इसकी सामर्थता बढ़ाई जाए और इसको संपर्क सूत्र में देश को एक सूत्र में बांधने की भाषा सुनिश्चित किया जाए क्योंकि इसमें शब्द भंडार भी है, शब्द संपदा भी है। मुझे लगता है कि शायद दुनिया में शायद यही एक ऐसी भाषा होगी संभवतः जिसका 9 लाख से भी अधिक शब्द संपदा है तो ये शब्द संपदा भी उसकी इसलिए बढ़ी है कि साथ-साथ ये जो हमारी बाइस भारतीय भाषा हैं इसको ताकत मिलती है और वे एक-दूसरे को पिरोकर के रखती हैं जरूरत है।

आज दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हिंदुस्तान में जो 30 करोड़ से भी अधिक लोगों को इस देश में एक दूसरे से जोड़ता है। 130 करोड़ ये जो भाषाएँ एक दूसरे से जोड़कर रखती हैं यह हमारी खूबसूरती भी है, ये हमारी ताकत भी है, और इसीलिए आपने देखा होगा कि अभी हम नई शिक्षा नीति में भाषा को लाये हैं, हमने कहा कि मातृभाषा। मातृभाषा वहाँ की जो क्षेत्रीय भाषा में बच्चा पढ़ेगा अपनी भाषा तो वो बच्चे की अभिव्यक्ति भी बाहर निकलकर के आयेगी और उस प्रदेश की वो भाषा भी हमारे देश की वो भाषा भी जिंदी रहेगी क्योंकि भाषा केवल शब्द नहीं है हमारी भावना हैं भाषा हमारी संपदाय है हमारी संस्कृति के ये संस्कार है जीवन मूल्य हैं भाषा के अंदर हमारी परंपरायें हैं सब कुछ नियत है इन भाषाओं के अंदर इनको हम टूटने नहीं दे सकते। मजबूती के साथ दुनिया में हिंदुस्तान ही एक ऐसा देश है जिसमें विविधता में भी एकता है तमाम सभी जितनी भाषाएँ हैं और बोलियां हैं हजारों, हजारों बोलियां हैं। जो हमारी ये भाषाएं हैं। भाषाओं को कैसे एक सूत्र में पिरो सकते हैं वो काम हिंदी का भी ज्यादा महत्वपूर्ण है।

मुझे आशा है कि इन परिस्थतियों में जबकि पूरी दुनिया में हिंदी का गौरव मैं देखता हूँ माॅरिशस, इण्डिोनेशिया, मलेशिया हो, ट्रिनीडाड हो, तमाम देशों में जब जाना होता है और अनिल जी तो दुनिया के देशों में घूमे हैं ये तभी इस मंत्रालय में हिंदी के काम को करते थे अब मुझे याद आता है कि जब उत्तराखंड का मैं मुख्यमंत्री था तब ये विदेश में थे तब विदेशी बच्चों को लेकर ये आगरा आए थे जिसके स्वयं वे अब उपाध्यक्ष हो गए हैं। मेरे उत्तराखंड आये थे हरिद्वार आये थे तो मैं ये समझता हूँ कि दुनिया में हिंदी को सीखने के प्रति अभीप्सा है जिज्ञासा है उनको लगता है कि हिंदुस्तान को समझना है तो हिंदी का जरूर जानना है और मैं सोचता हूँ दुनिया में हिंदी का जिस तरह से सम्मान बढ़ा है इसे और भी बहुत मतबूत कर सकते हैं और इस मजबूती के पीछे हमारे दक्षिण भारत के जितने भी राज्य उनका बहुत बड़ा योगदान हैं गांधी जी ने इसीलिए दक्षिण भारत हिंदी प्रचारिणी सभा को करके वैतरणिक दान किया था मुझे लगता है कि जिस तरीके से केंद्रीय हिंदी संस्थान के ये जो आठ केंद्र हैं हैदराबाद, गुवाहाटी, दीमापुर, शिलांग, मैसूर, भुवनेश्वर, अहमदाबाद और दिल्ली ये आठों केंद्र हिंदी के लिए समर्पित हैं जो हिंदी को पढ़ा रहे हैं सिखा रहे हैं, पाठ्यक्रमों में सम्मिलित कर रहे हें और मुझे लगता है कि ये जो आठ केंद्र हैं अभी भी सब लोग जुड़े हुए होंगे। मुझे उन आठो केंद्रों से अपेक्षा है कि गतिशीलता से काम करते हैं उनके प्रति लोगों में जो आकर्षकता है कैसे इसको बढ़ा सकते हैं। राज्यों में ये केंद्र हैं वहां पर कैसे करके मदद कर सकते हैं। 130 करोड़ लोगों के साथ सीधे संवाद पहुंचा सकते हैं हिंदी के माध्यम से मुझे इस बात को कहते हुए खुशी होती है।

सुबह अनिल जी से बात हो रही थी कि अनिल जी ने मुझे बताया कि इस केंद्र की जो स्थापना है स्थापना ही जिनको हम लोग बात कर रहे थे केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा ही जिसकी स्थापना जिसकी आठ शाखाएँ हैं इसकी स्थापना डाॅ0 मोटूरि सत्यनारायण ने की थी, जो महात्मा गांधी के अनन्य अनुयायी थे उन्होंने किया हिंदी के प्रति प्रेम और लगाव था उन्होंने आगरा में हिंदी संस्थान की स्थापना कर पूरे देश के अंदर हिंदी को कैसे कर विकसित किया जा सकता है। तेलंगाना की धरती पर रहकर पद्मभूषण डाॅ. सत्यनारायण मोटूरि जी ने केंद्रीय हिंदी संस्थान की स्थापना की, ये कोई छोटी बात नहीं। आज हम बहुत याद कर रहे हैं।

हमें संकल्प लेने की भी आवश्यकता है इस केंद्र को हैदराबाद केंद्र को भी और मेरे केंद्रीय हिंदी संस्थान को भी कि उसे सभी आठ के आठ शाखाएं हैं ये जो आठ के आठ क्षेत्रीय कार्यालय हैं उसी गतिशीलता से काम करें हमको तो मालूम है कि गांधी ने भी कहा था कि जिस राष्ट्र की अपनी भाषा नहीं है वो गूँगा है इसलिए ये समय आ गया है कि अंबेडकर जी के सपनों को साकार करना है।  गांधी जी और अंबेडकर जी ने भी सब तरीके से हर जगह हर स्थान पर कहा भाषा बहुत जरूरी है एक सूत्र में पिरोने वाली ये पहचान देने वाली है हिंदुस्तान से बाहर होंगे किसी देश में कोई व्यक्ति हिंदी में भाषण देता है तो वह हिंदुस्तानी होगा। अटल जी ने पहली बार भाषण दिया था यू.एन. में तो कितना दुनिया में कितना उनकी धाक जमीं थी।

मैं एक बार फिर बधाई देता हूँ मेरी शुभकामना है कि इस केंद्र को और सशक्त और मजबूत करेंगे और हिंदी का वैभव पूरी दुनिया में विकसित करेंगे ताकि देश को गौरव हो सके। बहुत-बहुत धन्यवाद।

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 सूचना-पट

संस्थान मुख्यालय, आगरा में आशुलिपिक (अनुवंध आधार पर) की नियुक्ति हेतु वॉक-इन- इँटरव्यू विज्ञापन (नया) 

श्री रमेश पोखरियाल निशंक, माननीय केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं अध्यक्ष, केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल को उनकी विशिष्ट एवं सुदीर्घ सर्जनात्मक जीवन यात्रा के लिए वातायन अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मान से अलंकृत किया गया। (नया)

सांध्यकालीन पाठ्यक्रम विभाग द्वारा संचालित स्नातकोत्तर जनसंचार एवं पत्रकारिता डिप्लोमा पाठ्यक्रम (आगरा) सत्र 2020-21 के प्रवेशार्थियों के लिए शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 27 नवंबर 2020 तक बढ़ाई गई। (नया) 

सांध्यकालीन पाठ्यक्रम विभाग द्वारा संचालित स्नातकोत्तर जनसंचार एवं पत्रकारिता डिप्लोमा पाठ्यक्रम (आगरा) सत्र 2019-20 का परीक्षा परिणाम (नया) 

लघु पत्रिकाओं के लिए वित्तीय सहयोग योजना हेतु आवेदन एवं नियम निर्देशिका । सहायता : NGO दर्पण वेब पोर्टल पर यूनिक आई डी बनाने के लिए दिशा निर्देश  

केंद्रीय हिंदी संस्थान के दो-वर्षीय नियमित शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम - हिंदी शिक्षण निष्णात, हिंदी शिक्षण पारंगत और हिंदी शिक्षण प्रवीण में शिक्षण सत्र 2020-22 और एक वर्षीय विशेष गहन पाठ्यक्रम 2020-21 (प्रतिनियुक्ति केआधार पर) में चयनित अभ्यर्थियों की सूची। (नया)   

केंद्रीय हिंदी संस्थान के दो-वर्षीय नियमित शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम - हिंदी शिक्षण निष्णात, हिंदी शिक्षण पारंगत और हिंदी शिक्षण प्रवीण के सेवा-पूर्व श्रेणी के चयनित अभ्यर्थियों की सूची। (नया)   

सांध्यकालीन पाठ्यक्रम विभाग के स्नातकोत्तर जनसंचार एवं पत्रकारिता डिप्लोमा सत्र : 2020-21 में प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों की योग्यता के आधार पर प्रवेश हेतु चयनित अभ्यर्थियों की सूची (नया)

संस्थान में लेखा अधिकारी का एक पद प्रतिनियुक्ति आधार पर भरे जाने संबंधी विज्ञापन सं. 9/2020 |  आवेदन पत्र | दिशा-निर्देश(नया)

स्नातकोत्तर जनसंचार एवं पत्रकारिता डिप्लोमा पाठ्यक्रम (आगरा)-2020 का संशोधित वार्षिक परीक्षा कार्यक्रम। (नया)

केंद्रीय हिंदी संस्थान, दिल्ली केंद्र हेतु कनिष्ठ पुस्तकालय सहायक का एक पद प्रतिनियुक्ति/ लियन आधार पर भरे जाने संबंधी विज्ञापन सं. 7/2020 | आवेदन पत्र | अन्य विवरण | (नया)

हैदराबाद केंद्र के उद्घाटन के अवसर पर माननीय शिक्षा मंत्री द्वारा दिया गया उद्बोधन । कार्यक्रम का यूट्यूब वीडियोफोटो अलबमप्रेस विज्ञप्ति ।  (नया)

श्री रमेश पोखरियाल निशंक, माननीय शिक्षा मंत्री भारत सरकार द्वारा सोमवार, दिनांक 05/10/2020 को अपराह्न 03 बजे केंहिंसं. हैदराबाद केंद्र के भवन का ई-उद्घाटन | निमंत्रण पत्र | ऑनलाइन कार्यक्रम से जुड़ने के लिए संस्थान के यूट्यूब लाइव अथवा फ़ेसबुक लाइव चैनलों पर जाएँ।  (नया)

केंद्रीय हिंदी संस्थान अहमदाबाद केंद्र द्वारा गांधी जयंती कार्यक्रम (ई-संगोष्ठी) का आयोजन। कार्यक्रम विवरण। (नया)

संस्थान मुख्यालय आगरा पर संचालित द्विवर्षीय पाठ्यक्रम (हिंदी शिक्षण निष्णात, हिंदी शिक्षण पारंगत और हिंदी शिक्षण प्रवीण) में अध्ययनरत प्रथम और द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षा-2020 ऑनलाइन आयोजित की जाएगी। समय सारिणी एवं संबंधित विवरण संस्थान वेबसाइट के सूचना-पट पर शीघ्र प्रदर्शित किया जाएगा।  (नया/महत्त्वपूर्ण)

कोविड-19 की विशेष परिस्थिति के कारण संस्थान मुख्यालय आगरा पर संचालित द्विवर्षीय पाठ्यक्रम (हिंदी शिक्षण निष्णात, हिंदी शिक्षण पारंगत और हिंदी शिक्षण प्रवीण)  के सत्र 2020-21 में प्रवेश हेतु प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। उक्त सभी पाठ्यक्रमों में प्रवेश निर्धारित योग्यता मानकों के आधार  किए जाएँगे। इसकी सूची को संस्थान वेबसाइट के सूचना-पट पर शीघ्र प्रदर्शित किया जाएगा।  (नया/महत्त्वपूर्ण)

शिक्षक दिवस (दि.: 05.09.2020) के अवसर पर केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा आयोजित 'शिक्षकों से संवाद' कार्यक्रम - 'हिंदी शिक्षकों के समक्ष चुनौतियाँ'

भारत की नई शिक्षा नीति पर केंद्रित शैक्षिक उन्मेष पत्रिका के आगामी विशेषांक खंडों (ई-पत्रिका) के लिए आलेख आमंत्रण (पत्र डाउनलोड करें) (नया)

के.हिं.शि. मंडल के उपाध्यक्ष महोदय द्वारा माननीय अध्यक्ष जी का अभिनंदन एवं शैक्षणिक-साहित्यिक संवाद

कें.हिं.शि. मंडल के नवनियुक्त उपाध्यक्ष महोदय द्वारा संस्थान मुख्यालय का संदर्शन (दि. 10 जुलाई 2020)

हिंदी सेवी सम्मान योजना - वर्ष 2017 के पुरस्कारों की घोषणाप्रेस विज्ञप्तिवीडियो प्रेस वार्ता । 

संस्थान मुख्यालय में माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री जी का आगमन, दि. 24.2.2020, रविवार  (फोटो अलबम) (मीडिया रिपोर्ट)

साहित्य अकादमी और केंद्रीय हिंदी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में डॉ. नगेंद्र जन्म- 

       शतवार्षिकी समारोहएवं लेखक से भेंट कार्यक्रम
परिचय
  • केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के उच्चतर विभाग द्वारा 1960 ई. में स्थापित स्वायत्त संगठन केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल द्वारा संचालित शिक्षण संस्था है। संस्थान मुख्यतः हिंदी के अखिल भारतीय शिक्षण-प्रशिक्षण, अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार के लिए कार्य-योजनाओं का संचालन करता है।
  • संस्थान का मुख्यालय आगरा में स्थित है। इसके आठ केंद्र - दिल्ली (स्था. 1970), हैदराबाद (स्था. 1976), गुवाहाटी (स्था. 1978), शिलांग (स्था. 1987), मैसूर (स्था. 1988), दीमापुर (स्था. 2003), भुवनेश्‍वर (स्था. 2003) तथा अहमदाबाद (स्था. 2006) में सक्रिय हैं।

और..

विकास यात्रा

केंद्रीय हिंदी संस्थान की स्थापना सन् 1960 में हुई थी। तब से आज तक लगातार मंडल द्वारा निर्धारित लक्ष्यों एवं उद्देश्यों के अनुपालन में संस्थान हिंदी के शैक्षणिक विकास, बहुआयामी अनुसंधान और प्रचार-प्रसार के लिए अपनी गतिविधियों को विस्तार देता रहा है। पाँच दशकों से अधिक लंबी इस विकास-यात्रा के उल्लेखनीय पड़ावों की जानकारी इस खंड में बिंदुवार प्रस्तुत की जा रही है।

...और

विज़न 2021
  • आधुनिकतम संचार माध्यमों और सूचना प्रौद्योगिकी का हिंदी भाषा शिक्षण और दूर शिक्षा के लिए अधिकाधिक प्रयोग
  • यूनिकोड का व्यापक प्रचार और प्रसार
  • एक विशाल पोर्टल और बहुभाषी वेबसाइट
  • पॉप्युलर कल्चर के महत्त्व का रेखांकन, फ़िल्म लोक-नाट्य, कविसम्मेलन और मुशायरे
  • हिंदी की बोलियों का संरक्षण हो तथा देश-विदेश में नए केंद्रों की स्थापना
  • देश-विदेश के हिंदी के प्रख्यात साहित्य शिल्पियों के व्यक्तित्व और कृतित्व पर फ़िल्में बनाई जाएं
  • विश्व भर की संस्थाओं और विश्वविद्यालयों से सकर्मक जुड़ाव
  • मानकीकृत पाठ्यक्रमों का निर्माण एवं संचालन
  • विश्व के महान साहित्यिक कृतियों और ज्ञान-विज्ञान के ग्रंथों का हिंदी अनुवाद
  • जिन संस्थाओं के पास साधनों का अभाव है, हिंदी के विकास के लिए उनकी मदद

और..

फ़ोटो गैलरी

संस्थान की विविध गतिविधियों से संबंधित छवियों का विस्तृत संग्रह

और...

ओडियो-विजुअल गैलरी

स्वर्ण जयंती वीडियो

केंद्रीय हिंदी संस्थान की स्वर्ण जयंती

उपयोगी लिंक

हिंदी शिक्षण, हिंदी भाषा संसाधन और संवर्धन से जुड़ी उपयोगी सूचना एवं जानकारियों से जुड़ी वेबसाइटों और वेब-पोर्टलों के लिंक।

और...

ऑनलाइन पत्रिकाएँ

गवेषणा - अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान, भाषाशिक्षण तथा साहित्य चिंतन की त्रैमासिक शोध पत्रिका

प्रवासी जगत - प्रवासी जगत का साहित्य, साहित्यकार व संस्कृति केंद्रित पत्रिका

शैक्षिक उन्मेष - शिक्षा जगत की शोध एवं विचार केंद्रित पत्रिका

भावक - हिंदी साहित्य-सृजन एवं चिंतन के विविध आयामों पर केंद्रित पत्रिका

समन्वय पश्चिम - पश्चिम भारत की भाषा, साहित्य एवं संस्कृति संबंधी चिंतन पर केंद्रित पत्रिका

समन्वय पूर्वोत्तर - पूर्वोत्तर भारत की भाषा, साहित्य एवं संस्कृति संबंधी चिंतन पर केंद्रित पत्रिका 

समन्वय दक्षिण - दक्षिण भारत की भाषा, साहित्य एवं संस्कृति संबंधी चिंतन पर केंद्रित पत्रिका

संस्थान समाचार - संस्थान मुख्यालय एवं इसके क्षेत्रीय केंद्रों का त्रैमासिक समाचार बुलेटिन


संस्थान प्रकाशन सूची - 2020