बुधवार, जून 19

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वाई. लक्ष्मी प्रसाद

Y.Laxmi-prasad

आचार्य वाई. लक्ष्मी प्रसाद केंद्रीय हिंदी संस्थान के पूर्व उपाध्यक्ष हैं। वाई. लक्ष्मी प्रसाद का जन्म 24 नवम्बर,1953 में आंध्र प्रदेश में हुआ था। इनका पूरा नाम 'आचार्य यार्ल गड्डा लक्ष्मी प्रसाद' है। लक्ष्मी प्रसाद विलक्षण प्रतिभा के धनी मनीषी और प्रसिद्ध साहित्यकार हैं। हिंदी और तेलुगू भाषाओं के मध्य शोध कार्य, आलेख, आलोचना तथा अनुवाद के द्वारा आचार्य लक्ष्मी प्रसाद ने समृद्ध संवाद को गतिशील किया है। मानवतावादी दृष्टि तथा समन्वयवादी सृजनशील प्रवृति ने उनके व्यक्तित्व को उत्तर और दक्षिण की समेकित संस्कृति का प्रतीक बना दिया है।

पुस्तकें

आचार्य लक्ष्मी प्रसाद की हिंदी में प्रकाशित पुस्तकें निम्नलिखित हैं-

  1. तेलुगू के आधुनिक कवि वैरागी
  2. हिंदी कविता को आंध्रों की देन
  3. आत्महत्या
  4. कविराज त्रिपुर रेनी के दो पौराणिक नाटक

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इसके अतिरिक्त तेलुगू में भी लक्ष्मी प्रसाद की कई महत्वपूर्ण पुस्तकें हैं। आचार्य लक्ष्मी प्रसाद अपनी दृष्टि और लक्ष्य की व्यापकता के कारण अनेक संगठनों-संस्थाओं व सभाओं से संबद्ध रहे हैं। 'लोकनायक ट्रस्ट' की स्थापना कर वे कई सेवा कार्यक्रमों तथा साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने में लगे हैं। संसदीय राजभाषा समिति के उपाध्यक्ष के रूप में भी आचार्य जी की उपलब्धियाँ राष्ट्रीय महत्व की रही हैं।

पुरस्कार

आचार्य लक्ष्मी प्रसाद को उनके कृतित्व के लिए वर्ष 2003 में 'पद्मश्री' से अंलकृत किया गया था। इसके अलावा भारत सरकार के कई मंत्रालयों के राष्ट्रीय पुरस्कार, साहित्यक अकादमी का अनुवाद पुरस्कार, उत्तर प्रदेश का सौहार्द्र सम्मा‍न आदि प्राप्त हो चुके हैं। आचार्य यार्ल गड्डा लक्ष्मी प्रसाद को 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' ने 'गंगाशरण सिंह पुरस्कार' से सम्मानित किया है।