गुरुवार, अक्टू 17

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विक्रम सिंह

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डॉ. विक्रम सिंह जी का जन्म जुलाई, 1960 ई. में हुआ था। एक साधारण किसान परिवार में इनका जन्म हुआ था। बाल्यकाल से लेकर प्रशासनिक सेवा के उच्चतर दायित्वों के निर्वाह तक डॉ. विक्रम सिंह अपने जीवन और लेखन के हर पड़ाव पर गहन श्रमशीलता और कर्मठता का पाठ रचते दिखाई देते हैं। देश-विदेश की अनेक संस्थाओं द्वारा विक्रम सिंह को सम्मानित किया जा चुका है।

रचना कार्य

अपने नाम पर दर्ज तमाम महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बावजूद जड़ और ज़मीन से एक निरंतर गहरा जुड़ाव विक्रम सिंह जी के विपुल रचना-कर्म में दिखाई देता है, जो कविता, कहानी, नाटक, यात्रा वृत्तांत, निबंध, आलोचना जैसी अनेक विधाओं में फैला हुआ है। अभी तक विभिन्न विधाओं में आपकी सत्रह पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं और अनेक प्रकाशनाधीन हैं। 'समय की सिलवटों से झाँकता इतिहास', 'सूरजः चाँदनी रात में', 'ताजमहल से टावरब्रिज' और 'नॉर्वेः द चैंपियन ऑफ़ वर्ल्ड पीस' आपके बहुचर्चित और पुरस्कृत यात्रा वृत्तांत हैं।

व्यक्तित्व

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बहुआयामी रचनात्मक व्यक्तित्व के धनी डॉ. विक्रम सिंह भारतविद के रूप में भी जाने जाते हैं। इस रूप में भारत के सांस्कृतिक इतिहास का सचेत अध्ययन-अन्वेषण करते हुए वे अपने अध्ययन का फलक पुरातन परंपराओं की जटिल अंतग्रंथियों से लेकर समकालीन सामाजिक सरोकारों तक फैलाते हैं। विचारोत्तेजक लोकगंधी भाषा और स्वयंवदात्मक शैली में रचित डॉ. सिंह का लेखन भाषा, शिल्प और वस्तु रूप के नए प्रतिमान गढ़ने के बजाय सामाजिक जीवन से विलुप्त मानवीय संवेदना की वैज्ञानिक भावभूमि तैयार करने का प्रयत्न करता है।

पुरस्कार

विदेश विभाग के अवैतनिक हिंदी विशेषज्ञ और सलाहकार रह चुके डॉ. सिंह को देश-विदेश की अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है। अतीत के सुनहरे शब्दचित्रों से वैज्ञानिक भविष्य की इंद्रधनुषी संभावनाओं तक की उद्देश्यपूर्ण यात्राक्रम के अद्भुत चितेरे डॉ. विक्रम सिंह को हिंदी में उत्कृष्ट यात्रावृत्त लेखन के लिए 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' ने 'महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार' से सम्मानित किया है। इस सम्मान को प्रदान करते हुए संस्थान ने अत्यंत आनन्द का अनुभव किया है।