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माननीय शिक्षा मंत्री जी का उद्बोधन

केंद्रीय हिंदी संस्थान हैदराबाद के नवनिर्मित भवन के उद्घाटन के अवसर पर केंद्रीय हिंदी संस्थान के सभी उपस्थित सभी अधिकारीगण, कर्मचारीगण, उस क्षेत्र की संपूर्ण उपस्थित जनता, हमारे साथ जुड़े हमारे राज्यमंत्री श्री धोत्रे जी, तेलंगाना सरकार के मंत्री मल्ला रेड्डी जी, जिनका अभी हमको मार्गदर्शन मिला। हमारे सांसद रेवंत रेड्डी जी, सचिव अमित खरे जी, हमारे छावनी विधायक जी. सयाना जी, केंद्रीय हिंदी संस्थान के यशस्वी उपाध्यक्ष श्री अनिल शर्मा जोशी जी, केंद्रीय हिंदी संस्थान की निदेशक प्रो. बीना जी और यहाँ पर सभी उपस्थित हिंदी शिक्षण मंडल के सदस्यगण !
मुझे लगता है कि हम सब एक अच्छे काम के लिए इस विकट स्थिति में एकत्र हुए हैं जबकि कोरोना से पूरी दुनिया संकट से गुजर रही है। ऐसे वक्त में भी हम सब लोग ऐसे भवन के उद्घाटन के लिए यहाँ पर एकत्रित हैं। जो हिंदी के लिए समर्पित हैं जो भारत की भाषाओं उनके उत्थान की दिशा में महत्वपूर्ण हिंदी के लिए काम करने वाले लोग और हिंदी को सीखने वाले, पढ़ने, पढ़ाने वाले और उसके साहित्य में रुचि रखने वाले हिंदी का वैभव पूरी दुनिया में विकसित करने वाले, ऐसे सभी लोग आज देश और दुनिया के इस अवसर पर हमारे साथ जुड़े हुए हैं। मैं उन सभी लोगों का अभिवादन करता हूँ, सम्मान कर रहा हूँ।

मुझे इस बात की खुशी है कि तेलंगाना गर्वमेंट ने एक अच्छे संस्थान के लिए जमीन उपलब्ध कराई और भारत सरकार के तत्कालीन शिक्षा राज्य मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तत्कालीन मंत्री ने उसका शिलान्यास किया जो बहुत विद्वान आदमी हैं और उसके बाद आज 2018 के बाद पूरे 2 वर्ष से पहले ही हम लोकार्पण के लिए एकत्रित हुए हैं। यह बहुत कम होता है कि 2 साल में संस्थान कोई निर्माण कार्य पूरा कर दे।

हमारे लिए बहुत सुखद क्षण है। यह श्रेय मैं हैदराबाद केंद्र को, इस संस्थान के उपाध्यक्ष जी को सब लोगों को बधाई देता हूँ। शुभकामना देता हूँ और बधाई भी देता हूँ कि आप बहुत अच्छे समय पर आपने किया है।

माननीय मंत्री रेड्डी जी जो श्रम रोजगार और महिला बाल विकास मंत्री हैं और समझ सकते हैं, महिला कल्याण के भी हैं। मुझे लगता है कि उनके द्वारा पहले बताया गया कि शिलान्यास में उस समय वे थे। माननीय मुख्यमंत्री जी भी यहाँ थे और मुझे लगता है कि कोई हिंदी के लिए बड़े संस्थान की प्रतीक्षा तेलंगाना मुख्यमंत्री जी से कर रहे हैं ताकि वो हमारे बीच रहें आ सकें। तो मैं रेड्डी जी से कहूँगा कि मेरी ओर से मुख्यमंत्री जी को तेलंगाना के मुख्यमंत्री जी को बधाई दीजिएगा, शुभकामना दीजिएगा और इस अच्छे संस्थान के अच्छे लोगों को साधुवाद दीजिएगा कि आप जिस रुचि से देखता हूँ तेलंगाना में आप बहुत अच्छे तरीके से हिंदी का प्रचार-प्रसार हुआ है और ये जो केंद्र है हैदराबाद का यहाँ से हिंदी को लेकर बाहर जा रहे हैं देश के विभिन्न कोनों में जब मुझे इस राज्य के अच्छी हिंदी बोलते हुए लोग मिलते हैं तो मुझे बहुत खुशी होती है तो मैं बोलता हूँ। इतनी अच्छी हिंदी बोल रहे हैं तो वो बताते हैं कि हमारा केंद्र है और हर वर्ष हजारों लोग हिंदी की परीक्षाओं को भी देते हैं। मुझे लगता है कि उस विजन को, गांधी के उस मिशन को, गांधी के उस सपने को साकार कर रहे हैं जिसमें देश आजादी के बाद जो गांधी जी ने पहले सोचा था।

इस देश में हमारी जो 22 संविधान में बहुत खूबसूरत में जो बाइस भारतीय भाषाएँ हैं तमिल है, तेलुगु है, मलयालम है, कन्नड़ है, गुजराती है, मराठी है, बंगाली है, ओड़िया है, संस्कृत है, हिंदी है, उर्दू है, पंजाबी है, असमिया है ये हमारी जो बाइस बहुत सुंदरतम् भारत की भाषाएँ हैं जो संविधान के अनुच्छेद अनुसूची 8 में हमको प्राप्त हैं। इन बाइस की बाइस भाषाओं को और सशक्त करने का हमको काम करना है और इसके बीच में संपर्क के रूप में एक सौहार्द के रूप में हिंदी को एक लड़ी के रूप में सबको जोड़ने का जो महत्वपूर्ण काम हमारे देश आजादी से पहले गांधी ने किया था, भीमराव अंबेडकर ने दिया था और जिसमें संविधान में उल्लेख भी रहा कि हिंदी को राजभाषा का दर्जा देकर के और हिंदी की सशक्तता के लिए ये जो भारत की बाइस भारतीय भाषाएँ हैं यदि जरूरत पड़ती है तो उनके से भी शब्दों को लेकर के इसकी सामर्थता बढ़ाई जाए और इसको संपर्क सूत्र में देश को एक सूत्र में बांधने की भाषा सुनिश्चित किया जाए क्योंकि इसमें शब्द भंडार भी है, शब्द संपदा भी है। मुझे लगता है कि शायद दुनिया में शायद यही एक ऐसी भाषा होगी संभवतः जिसका 9 लाख से भी अधिक शब्द संपदा है तो ये शब्द संपदा भी उसकी इसलिए बढ़ी है कि साथ-साथ ये जो हमारी बाइस भारतीय भाषा हैं इसको ताकत मिलती है और वे एक-दूसरे को पिरोकर के रखती हैं जरूरत है।

आज दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हिंदुस्तान में जो 30 करोड़ से भी अधिक लोगों को इस देश में एक दूसरे से जोड़ता है। 130 करोड़ ये जो भाषाएँ एक दूसरे से जोड़कर रखती हैं यह हमारी खूबसूरती भी है, ये हमारी ताकत भी है, और इसीलिए आपने देखा होगा कि अभी हम नई शिक्षा नीति में भाषा को लाये हैं, हमने कहा कि मातृभाषा। मातृभाषा वहाँ की जो क्षेत्रीय भाषा में बच्चा पढ़ेगा अपनी भाषा तो वो बच्चे की अभिव्यक्ति भी बाहर निकलकर के आयेगी और उस प्रदेश की वो भाषा भी हमारे देश की वो भाषा भी जिंदी रहेगी क्योंकि भाषा केवल शब्द नहीं है हमारी भावना हैं भाषा हमारी संपदाय है हमारी संस्कृति के ये संस्कार है जीवन मूल्य हैं भाषा के अंदर हमारी परंपरायें हैं सब कुछ नियत है इन भाषाओं के अंदर इनको हम टूटने नहीं दे सकते। मजबूती के साथ दुनिया में हिंदुस्तान ही एक ऐसा देश है जिसमें विविधता में भी एकता है तमाम सभी जितनी भाषाएँ हैं और बोलियां हैं हजारों, हजारों बोलियां हैं। जो हमारी ये भाषाएं हैं। भाषाओं को कैसे एक सूत्र में पिरो सकते हैं वो काम हिंदी का भी ज्यादा महत्वपूर्ण है।

मुझे आशा है कि इन परिस्थतियों में जबकि पूरी दुनिया में हिंदी का गौरव मैं देखता हूँ माॅरिशस, इण्डिोनेशिया, मलेशिया हो, ट्रिनीडाड हो, तमाम देशों में जब जाना होता है और अनिल जी तो दुनिया के देशों में घूमे हैं ये तभी इस मंत्रालय में हिंदी के काम को करते थे अब मुझे याद आता है कि जब उत्तराखंड का मैं मुख्यमंत्री था तब ये विदेश में थे तब विदेशी बच्चों को लेकर ये आगरा आए थे जिसके स्वयं वे अब उपाध्यक्ष हो गए हैं। मेरे उत्तराखंड आये थे हरिद्वार आये थे तो मैं ये समझता हूँ कि दुनिया में हिंदी को सीखने के प्रति अभीप्सा है जिज्ञासा है उनको लगता है कि हिंदुस्तान को समझना है तो हिंदी का जरूर जानना है और मैं सोचता हूँ दुनिया में हिंदी का जिस तरह से सम्मान बढ़ा है इसे और भी बहुत मतबूत कर सकते हैं और इस मजबूती के पीछे हमारे दक्षिण भारत के जितने भी राज्य उनका बहुत बड़ा योगदान हैं गांधी जी ने इसीलिए दक्षिण भारत हिंदी प्रचारिणी सभा को करके वैतरणिक दान किया था मुझे लगता है कि जिस तरीके से केंद्रीय हिंदी संस्थान के ये जो आठ केंद्र हैं हैदराबाद, गुवाहाटी, दीमापुर, शिलांग, मैसूर, भुवनेश्वर, अहमदाबाद और दिल्ली ये आठों केंद्र हिंदी के लिए समर्पित हैं जो हिंदी को पढ़ा रहे हैं सिखा रहे हैं, पाठ्यक्रमों में सम्मिलित कर रहे हें और मुझे लगता है कि ये जो आठ केंद्र हैं अभी भी सब लोग जुड़े हुए होंगे। मुझे उन आठो केंद्रों से अपेक्षा है कि गतिशीलता से काम करते हैं उनके प्रति लोगों में जो आकर्षकता है कैसे इसको बढ़ा सकते हैं। राज्यों में ये केंद्र हैं वहां पर कैसे करके मदद कर सकते हैं। 130 करोड़ लोगों के साथ सीधे संवाद पहुंचा सकते हैं हिंदी के माध्यम से मुझे इस बात को कहते हुए खुशी होती है।

सुबह अनिल जी से बात हो रही थी कि अनिल जी ने मुझे बताया कि इस केंद्र की जो स्थापना है स्थापना ही जिनको हम लोग बात कर रहे थे केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा ही जिसकी स्थापना जिसकी आठ शाखाएँ हैं इसकी स्थापना डाॅ0 मोटूरि सत्यनारायण ने की थी, जो महात्मा गांधी के अनन्य अनुयायी थे उन्होंने किया हिंदी के प्रति प्रेम और लगाव था उन्होंने आगरा में हिंदी संस्थान की स्थापना कर पूरे देश के अंदर हिंदी को कैसे कर विकसित किया जा सकता है। तेलंगाना की धरती पर रहकर पद्मभूषण डाॅ. सत्यनारायण मोटूरि जी ने केंद्रीय हिंदी संस्थान की स्थापना की, ये कोई छोटी बात नहीं। आज हम बहुत याद कर रहे हैं।

हमें संकल्प लेने की भी आवश्यकता है इस केंद्र को हैदराबाद केंद्र को भी और मेरे केंद्रीय हिंदी संस्थान को भी कि उसे सभी आठ के आठ शाखाएं हैं ये जो आठ के आठ क्षेत्रीय कार्यालय हैं उसी गतिशीलता से काम करें हमको तो मालूम है कि गांधी ने भी कहा था कि जिस राष्ट्र की अपनी भाषा नहीं है वो गूँगा है इसलिए ये समय आ गया है कि अंबेडकर जी के सपनों को साकार करना है।  गांधी जी और अंबेडकर जी ने भी सब तरीके से हर जगह हर स्थान पर कहा भाषा बहुत जरूरी है एक सूत्र में पिरोने वाली ये पहचान देने वाली है हिंदुस्तान से बाहर होंगे किसी देश में कोई व्यक्ति हिंदी में भाषण देता है तो वह हिंदुस्तानी होगा। अटल जी ने पहली बार भाषण दिया था यू.एन. में तो कितना दुनिया में कितना उनकी धाक जमीं थी।

मैं एक बार फिर बधाई देता हूँ मेरी शुभकामना है कि इस केंद्र को और सशक्त और मजबूत करेंगे और हिंदी का वैभव पूरी दुनिया में विकसित करेंगे ताकि देश को गौरव हो सके। बहुत-बहुत धन्यवाद।