मंगलवार, अक्टू 15

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आप यहाँ हैं:घर संस्थान नियमावली चिकित्सा नियम

चिकित्सा नियम

  1. छात्रावास में रहने वाले प्रशिक्षणार्थियों की अस्वस्थता के दिनों में संस्थान की ओर से चिकित्सा की व्यवस्था है। संस्थान द्वारा नियुक्त डॉक्टर संस्थान भवन में आकर उनकी चिकित्सा करते हैं।
  2. संस्थान के डॉक्टर द्वारा ही प्रशिक्षणार्थियों को अपनी चिकित्सा करानी होगी। वार्डन से अनुमति लेकर बाहर के डॉक्टर से उसी दशा में चिकित्सा करा सकते हैं जबकि

    (i) संस्थान के डॉक्टर अवकाश पर हों या

    (ii) ऐसे समय जब उन्हें बुलाना संभव न हो।

    ऐसी दशा में वार्डन अपने विवेक से बीमार छात्र को सरकारी अस्पताल भेज सकते हैं या संस्थान द्वारा पूर्व-अधिकृत डॉक्टर से चिकित्सा करा सकते हैं। इस प्रकार की चिकित्सा एक या दो दिन के लिए या उस अवधि के लिए होगी जबकि संस्थान के डॉक्टर अवकाश पर होंगे। इस चिकित्सा का व्यय संस्थान अपने नियमों के अनुसार वहन करेगा।
  3. यदि कोई छात्र/छात्र अपनी इच्छा से, वार्डन की अनुमति के बिना किसी बाहरी डॉक्टर से चिकित्सा कराएँगे तो उसका सारा व्यय उन्हें स्वयं वहन करना होगा। संस्थान ऐसी किसी भी चिकित्सा की कोई जिम्मेदारी नहीं लेगा।
  4. उपर्युक्त नियम (2) तीन मास या अधिक की अवधि के पाठ्यक्रमों पर ही लागू होगा। इससे कम अवधि के पाठ्यक्रम के छात्रों की चिकित्सा संस्थान के डॉक्टर की चिकित्सा तक ही सीमित रहेगी।
  5. डॉक्टर की फीस और दवाइयों के दाम के लिए प्रति छात्र से मासिक रु. 50/- चिकित्सा शुल्क लिया जाता है।
  6. केवल संस्थान के नियुक्त डॉक्टर के प्रमाण-पत्र के आधार पर ही चिकित्सा-अवकाश स्वीकृत करने पर विचार किया जाएगा।
  7. लंबी अवधि की चिकित्सा, शल्य क्रिया, अस्पताल में भर्ती होने के किसी भी व्यय को संस्थान नहीं उठाएगा। यदि कोई भी छात्र इस प्रकार की अस्वस्थता से ग्रस्त होता है तो उसे पाठ्यक्रम से निलंबित कर दिया जाएगा।