सोमवार, नव 19

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माननीय विदेश राज्यमंत्री जनरल (डॉ.) वी.के. सिंह (रिटा.) का संस्थान आगमन, नवनिर्मित भव्य प्रवेश द्वार : 'मोटूरि सत्यनारायण द्वार' का उद्घाटन एवं अं.हिं.शि. पाठ्यक्रम सत्र 2018-19 का शुभारंभ

(फोटो एलबम देखें)

दिनांक 17 अक्टूबर, 2018 दिन बुधवार को पूर्वाह्न में केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के नवनिर्मित मुख्य प्रवेश द्वार का उद्घाटन केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री माननीय जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह (रिटायर्ड) के कमलों से संपन्न हुआ। मुख्य प्रवेश द्वार के उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के उपाध्यक्ष डॉ. कमल किशोर गोयनका और केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय उपस्थित थे। साथ ही संस्थान के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं स्वदेशी-विदेशी छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे। सर्वप्रथम डॉ. कमल किशोर गोयनका और प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय ने पुष्पगुच्छ भेंट कर माननीय मंत्री महोदय का प्रवेश द्वार पर स्वागत किया। तत्पश्चात स्वदेशी-विदेशी छात्राओं ने चंदन का तिलक कर और पुष्प वर्षा से मंत्री महोदय का स्वागत किया।
केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के मुख्य प्रवेश द्वार का नाम संस्थान के संस्थापक पद्मभूषण मोटूरि सत्यनारायण के नाम पर रखा गया है। इस प्रवेश द्वार का निर्माण केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय के अथक प्रयासों से संपन्न हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग के सत्र 2018-19 का शुभारंभ
केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के नवनिर्मित मुख्य प्रवेश द्वार के उद्घाटन के उपरांत माननीय विदेश राज्य मंत्री जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह द्वारा अंतरराष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग के सत्र 2018-19 का औपचारिक शुभारंभ संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि माननीय मंत्री महोदय थे और विशिष्ट अतिथि के रूप में आगरा के महापौर श्री नवीन जैन उपस्थित थे। साथ ही मंच पर केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के उपाध्यक्ष डॉ. कमल किशोर गोयनका और केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय उपस्थित थे। अतिथि के रूप में माननीय विधायक श्री जगन प्रसाद गर्ग और डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अरविंद दीक्षित जी सभागार में उपस्थित थे।
अटल बिहारी वाजपेयी अंतरराष्ट्रीय सभागार में मंच पर अतिथियों द्वारा स्थान ग्रहण करने पर सर्व प्रथम माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन किया गया। इसके साथ ही विदेशी छात्राओं द्वारा दीपोज्योति मंत्र का उच्चारण किया गया। दीपोज्योति मंत्र का उच्चारण करने वाली छात्राएँ- श्रीलंका से हसन्ति, निमेषा, कलणि, संदुनि, हिमाली, रसांगी, पोलैंड से अन्ना, त्रिनिडाड से नरेंद्र और सूरीनाम से प्रशांत थे। इसके उपरांत विदेशी छात्र-छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। सरस्वती वंदना प्रस्तुत करने वाले छात्र थे- चतुरंगी, दिमुतु, मयूरी, सुलोचना- श्रीलंका से तथा जयपान तशनाई- थाईलैंड से और मिशेल- कैमरुन एवं नारान- मंगोलिया से।
इसके उपरांत उत्तरीय, श्रीफल और पुष्पगुच्छ भेंट कर मंचस्थ अतिथियों का स्वागत किया गया। केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय ने उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने अपने स्वागत भाषण में संस्थान की रूपरेखा और कार्य पद्धति का परिचय दिया। निदेशक महोदय ने कहा कि संस्थान के लिए सौभाग्य का क्षण है कि संस्थान को एक भव्य द्वार मिला है। यह द्वार एडसिल (EDCIL) द्वारा निर्मित किया गया है। उन्होंने कहा कि रिटायर्ड जनरल और भारत के विदेश राज्य मंत्री ने संस्थान के अनुरोध को स्वीकर किया, यह संस्थान के लिए गर्व का विषय है। अपने वक्तव्य में निदेशक महोदय ने कहा कि संविधान सभा के सदस्य और प्रयोजन मूलक हिंदी को बढ़ावा देने वाले मोटूरि सत्यनारायण ने इस संस्थान की स्थापना की और विशेष बात यह है कि दक्षिण भारत के एक बुद्धिजीवी ने संस्थान की स्थापना के लिए आगरा को चुना। उन्होंने कहा कि अब तक लगभग 5200 विदेशी विद्यार्थियों ने संस्थान से विभिन्न प्रकार की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। विदेशी विद्यार्थी विश्वभर में हिंदी की सेवा कर रहे हैं। निदेशक महोदय ने कहा कि संस्थान के इतिहास में पहली बार सबसे अधिक देशों के और सबसे अधिक संख्या में विदेशी छात्र हिंदी पढ़ने आये हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान से 08 शोध पत्रिकाएँ प्रकाशित हो रही हैं और देशभर की 50 लघु पत्रिकाओं को 50-50 हजार रुपये का अनुदान प्रतिवर्ष दिया जाता है। साथ ही भारत की क्षेत्रीय भाषाओं में 50 अध्येता कोश बनाने का कार्य चल रहा है जिनमें से 28 अध्येता कोश बनकर तैयार हो गए हैं। साथ ही 16 भागों में एक विश्वकोश तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 28 देशों के विद्यार्थी आगरा और 16 देशों के विद्यार्थी दिल्ली केंद्र पर अध्ययन हेतु अलग-अलग देशों से आए हैं।
प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय के स्वागत भाषण के बाद अंतरराष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गंगाधर वानोडे ने विभाग की ओर से प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने विभाग के पाठ्यक्रमों और विदेशी विद्यार्थियों के देशों और उनकी संख्या का विवरण प्रस्तुत किया।
इसके उपरांत स्वदेशी-विदेशी विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। श्रीलंका की चतुरंगी, दिमुतु, सुलोचना, मयूरी तथा थाईलैंड की ताशनाई, मंगोलिया की नारान एवं कैमरून की मिशेल ने सारे जहां से अच्छा गीत प्रस्तुत किया। रूबी रॉय (असम), जयंती डुगुंरी, गौरीमुर्मु (ओडिसा), निओती, केसीगंले, रेनाआने, एच. तोतसंगला (नागालैंड) की छात्राओं ने ‘जो भी सुन ले तेरा हो ले’- कृष्ण भजन प्रस्तुत किया। इसके बाद खिमोला, काजंगले, हमसाई वंगथंगलो, जेलिना (नागालैंड) और तोपी, अंजोली, तोरी (अरुणाचल प्रदेश) की छात्राओं ने नागा नृत्य प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंत में स्वेता (अर्मेनिया), पाकीजा (बांग्लादेश), लोको, ड्यूला, नेयमिक (कैमरून), इरीना (यूक्रेन), बेल (फिलीपिंस), रयोता (जापान), बेजरिया, युवारत्न, बुरानिस (थाईलैंड), दियाना (बुल्गारिया), मिरेला (रोमानिया), आमीर (बांग्लादेश) के छात्र-छात्राओं ने डांडिया कृष्ण रास प्रस्तुत किया। इसमें कृष्ण बांग्लादेश का छात्र आमीर और राधा रोमानिया की छात्रा मिरेला थी।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के उपाध्यक्ष प्रो. कमल किशोर गोयनका ने अपने भाषण में कहा कि पूर्व जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह हिंदी भाषा के प्रति गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्ष में संस्थान की कार्य पद्धति और इसकी संरचना में अद्भुत परिवर्तन आया है। उन्होंने संस्थान में आने के लिए माननीय मंत्री जी का आभार व्यक्त किया।
विशिष्ट अतिथि आगरा शहर के वर्तमान महापौर श्री नवीन जैन ने विदेशी विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को यादगार क्षण बताया और कहा कि जीवन में प्रथम बार इस प्रकार की अद्भुत सांस्कृतिक प्रस्तुति देखी है। इन विदेशी विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति की धारा को जीवंत कर दिया है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और माननीय जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह (रिटा.) ने अपने वक्तव्य में कहा कि संस्थान में आकर मैं गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ। उन्होंने हिंदी भाषा के विषय में कहा कि हिंदी राजभाषा ही नहीं, हिंदी जनभाषा है। उन्होंने कहा कि सेना में पूरे देश के जवान हैं, इसलिए सेना की भाषा हिंदी है। यह बहुत सौभाग्य की बात है कि डॉ. मोटूरि सत्यनारायण ने दक्षिण से आकर आगरा में हिंदी के लिए कार्य किया। उन्होंने प्रयोजन मूलक हिंदी को बढ़ावा दिया। संस्थान का मुख्य प्रवेश द्वार डॉ. मोटूरि सत्यनारायण के नाम पर बनाया गया है यह गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि इस संस्थान को सुंदर बनाने का कार्य होना चाहिए ताकि यह विश्व की सबसे सुंदर संस्था बन सके।
कार्यक्रम की समाप्ति पर धन्यवाद ज्ञापन की औपचारिकता डॉ. ज्योत्स्ना रघुवंशी द्वारा संपन्न की गयी। कार्यक्रम का संचालन भी डॉ. ज्योत्स्ना रघुवंशी द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में आगरा के अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। संस्थान के सभी शिक्षक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।