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हिंदी सौ रत्नमाला पुस्तक निर्माण योजना

 

हिंदी सौ रत्नमाला पुस्तक निर्माण श्रृंखला

केंद्रीय हिंदी संस्थान करेगा हिंदी के सौ प्रतिनिधि साहित्यकारों की पुस्तकों का निर्माण

कार्यशाला दिनांक 08 अगस्त, 2018 का प्रतिवेदन । फोटो एलबम ।

केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के पू्र्वोत्तर शिक्षण सामग्री निर्माण विभाग के संयोजन में आयोजित एक-दिवसीय हिंदी सौ रत्‍नमाला पुस्‍तक निर्माण कार्यशाला में देश के वरिष्ठ हिंदी विद्वान शिक्षकों ने एकजुट होकर विचार मंथन किया। कार्यशाला का उद्घाटन सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण कर संस्थान के निदेशक प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय एवं साहित्य अकादमी के हिंदी सलाहकार प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित ने किया। आमंत्रित अतिथियों का स्वागत शैक्षिक समन्वयक प्रो. हरिशंकर एवं कार्यशाला संयोजक तथा पूर्वोत्तर सामग्री नि्र्माण विभाग के अध्यक्ष प्रो. उमापति दीक्षित ने किया।

अपने उद्घाटन वक्तव्य में प्रो. पाण्डेय ने कहा कि हिंदी साहित्य की लगभग एक हज़ार साल लंबी परंपरा में जितने ऊर्जावान हस्ताक्षर हैं, उन सबका अपना विशिष्ट स्थान है किंतु साहित्य और समाज के लिए दीर्घकालिक महत्व रखने वाले रचनाकारों का चुनाव और उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रामाणिक एवं सारगर्भित तरीके से पुस्तक लेखन श्रृंखला का आयोजन करना अपने-आप में एक बड़ा चुनौती और ज़िम्मेदारी भरा कार्य है। सौ रत्नमाला के अंतर्गत जिन सौ प्रतिनिधि साहित्यकारों पर पुस्तक निर्माण की योजना का आरंभ केंद्रीय हिंदी संस्थान ने किया है, उनकी व्यापक साहित्यिक महत्ता एवं अकादमिक उपादेयता है। ये पुस्तकें सामान्य हिंदी पाठकों से लेकर उच्च शिक्षा में संलग्न शिक्षार्थियों एवं शिक्षकों तक सबके लिए उपयोगी हों, ऐसा प्रयास किया जाना चाहिए। यह एक बड़ी योजना है और इसका निर्वाह करने के लिए समवेत प्रयासों की अपेक्षा है। इसे सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए चरणबद्ध ढंग से लक्ष्य निर्धारण एवं कार्य संपादन करने की आवश्यकता है।

प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित ने सौ रत्नमाला श्रृंखला के अंतर्गत चयनित रचनाकारों के नाम चयन की व्यापक संकल्पना और पृष्ठभूमि को स्पष्ट किया। उनका कहना था कि एक बार में दस-दस रचनाकारों का लक्ष्य लेकर कार्य आगे बढ़ाना चाहिए। जब एक चरण का कार्य एक निश्चित सीमा तक पहुँच जाए, तब अगले चरण के रचनाकारों का कार्य आरंभ करना उचित होगा। इस प्रकार निर्धारित समय में सौ रत्नमाला श्रृंखला को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकेगा।

लखनऊ विश्वविद्यालय से आए प्रो. पवन अग्रवाल ने संस्थान के प्रकाशन कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि केंद्रीय हिंदी संस्थान के अध्येता कोश और शोध पत्रिकाएँ जिस प्रकार बहुभाषिक एवं सांस्कृतिक समन्वय, राष्ट्रीय एकीकरण तथा शैक्षिक उन्नयन में योगदान दे रहे हैं, उसी प्रकार हिंदी साहित्य के विभिन्न कालखण्डों से चयनित प्रतिनिधि रचनाकारों पर आधारित पुस्तक निर्माण की यह योजना भी अपना राष्ट्रीय महत्व सिद्ध करेगी।

गहन विचार-विमर्श के बाद पहले चरण में पुस्तक निर्माण के लिए गोरखनाथ, विद्यापति, कबीरदास, तुलसीदास, सूरदास, जयशंकर प्रसाद, मैथिलीशरण गुप्त, प्रेमचंद, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' और आचार्य रामचंद्र शुक्ल के नाम तय किए गए। इन रचनाकारों के जीवन, व्यक्तित्व एवं कृतित्व से संबंधित विषयों पर आलेख लिखने के लिए उपयुक्त विद्वानों को जोड़ा जाएगा तदुपरांत इनका संयोजन संपादन कर पुस्तक रूप प्रदान किया जाएगा। आगामी विश्व पुस्तक मेला से पूर्व पहले चरण का कार्य प्रकाशित किए जाने का संकल्प लिया गया।

कार्यशाला में लखनऊ से प्रो. हरिशंकर मिश्र तथा प्रो. अलका पाण्डेय, इलाहाबाद से प्रो. रामकिशोर शर्मा, प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह तथा प्रो. निर्मला अग्रवाल, गया से प्रो. भरत सिंह, दिल्ली से प्रो. कैलाश नारायण तिवारी तथा प्रो. चंदन कुमार, गुवाहाटी से प्रो. दिलीप कुमार मेधी, जोधपुर से डॉ. नरेन्द्र मिश्र, मुंबई से डॉ. श्याम सुंदर पाण्डेय, कोच्चि से प्रो. एन.जी. देवकी एवं केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा से सूचना तथा भाषा प्रौद्योगिकी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर अनुपम श्रीवास्तव, मुनीशा पाराशर, डॉ. उमेश चंद्र सम्मिलित हुए। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. उमापति दीक्षित ने किया।