शनिवार, अप्रै 29

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कें.हिं.सं. में डिजिटल बैंकिंग एवं नक़द रहित लेन-देन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला

फ़ोटो एलबम

राष्ट्रीय विकास में नये दौर की दस्तक है डिजिटल बैंकिंग और नक़द-रहित लेन-देन

डिजिटल बैंकिंग और नक़द-रहित लेन-देन समग्र राष्ट्रीय विकास में नये दौर की दस्तक है। भारतीय लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्था और आर्थिक सुशासन के इतिहास में यह एक क्रांतिकारी पहल है। इससे देश की वित्त व्यवस्था में तो पारदर्शिता आएगी ही साथ ही काले धन के तमाम दरवाजे बंद होंगे और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।” - ये बातें केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय ने संस्थान के सूचना तथा भाषा-प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित एक-दिवसीय कार्यशाला के दौरान अपने उद्बोधन में कहीं। भारत सरकार के वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम (विसाका) के तहत दिनांक 10.01.2017 को संस्थान के नज़ीर सभागार में डिजिटल बैंकिंग एवं नकद रहित लेन-देन विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि ई-बैकिंग अनुप्रयोगों का इस्तेमाल स्वयं सीखने के साथ-साथ हमें दूसरों को भी सिखाना चाहिए पर सावधानी इस बात की भी होनी चाहिए कि इन अनुप्रयोगों का उपयोग करते समय जागरूकता, सुरक्षा और सावधानी बरती जाए। यह सब हमें कार्यशाला के लिए आए विशेषज्ञ प्रशिक्षकों से भरपूर सीख लेना चाहिए।

दो सत्रों में संपन्न हुई इस कार्यशाला में विशेषज्ञ प्रशिक्षक (रिसोर्स पर्सन) के रूप में सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया के आईटी प्रबंधक श्री पवन कुमार द्विवेदी एवं श्री अंजनी कुमार सिंह के साथ सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया की सहायक प्रबंधक सुश्री दीपिका शर्मा ने सभागार उपस्थित स्वदेशी एवं विदेशी विद्यार्थियों और संस्थान के शिक्षकों एवं प्रशासनिक को डिजिटल बैंकिंग एवं नक़द-रहित लेन-देन के लिए उपलब्ध ई-संसाधनों, अनुप्रयोगों और उनके संचालन एवं इस्तेमाल की प्रक्रियाओं के बारे में प्रशिक्षित किया। अपनी मल्टींमीडिया प्रस्तुतियों के साथ उन्होंने इसकी सुरक्षा एवं सावधानी से जुड़े पहलुओं के बारे में भी जानकारी दी।

संगोष्ठी-कार्यशाला में पधारे विशेषज्ञ प्रशिक्षकों एवं संस्थान के सदस्यों का स्वागत करते हुए सूचना तथा भाषा-प्रौद्योगिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. देवेंद्र शुक्ल ने कहा कि वित्तीय साक्षरता अभियान (विसाका) का यह अभियान इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि इससे भृष्टाचार पर रोक लगेगी और आम-जन के लिए आर्थिक सुशासन एवं सुविधा के नये रास्ते खुलेंगे। भारत सरकार और बैंकिंग सिस्टम ने देश में वित्तीय दिक्कतों को दूर करने के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी द्वारा समर्थित सॉफ़्ट-करेंसी और नक़द-रहित अंतरण के बहुत से विकल्प उपलब्ध कराए हैं, जैसेः एटीएम, डेबिट एवं क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, ई-वॉलेट आदि। इनके माध्यम से हम अपने विभिन्न आर्थिक लेन-देन और भुगतान बेहद सहज एवं सुविधाजनक रूप में कर सकते हैं। केंद्रीय हिंदी संस्थान का यह आयोजन डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा में अपने सभी सदस्यों को जागरूक करने की दिशा में एक समयानुकूल पहल है।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सदस्यों गुंजन जैन, दिवाकरनाथ त्रिपाठी, अनिल पांडेय, अनिल शर्मा, अब्बास अली ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यशाला का संयोजन एवं संचालन श्री अनुपम श्रीवास्तव ने किया।

इस कार्यशाला में प्रो. हरिशंकर, प्रो. बीना शर्मा, प्रो. महेंद्र सिंह राणा, डॉ. ज्योत्स्ना रघुवंशी, डॉ. प्रमोद रावत, जानकी जेठवानी, केशरी नंदन, प्रो. मीरा सरीन, डॉ. रामलाल वर्मा, डॉ. बीना माथुर, डॉ. अशोक मिश्र एवं प्रशासनिक वर्ग के सदस्यों के साथ ही संस्थान के स्वदेशी, विदेशी एवं पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थी मौजूद रहे।