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भारतीय राष्ट्रीय चेतना के कवि सुब्रह्मण्य भारती की जन्म जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन

राष्ट्र चेतना के महानायक थे सुब्रह्मण्यम भारती- प्रो. मोहन

कें.हिं.सं., मुख्यालय आगरा। दि. 11 दिसंबर, 2014

भारतीय राष्ट्रीय चेतना के महानायक तथा हिंदी एवं तमिल के महान कवि एवं साहित्यकार सुब्रह्मण्य भारती (1881-1920) का जन्मोत्सव समारोह दिनांक 11.12.2014 को संस्थान मुख्यालय के सूचना एवं प्रौद्योगिकी और अध्यापक शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मनाया गया।
इस अवसर पर उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व से जुड़े विभिन्न पक्षों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हुए उनके राष्ट्रीय एकतापरक विचार एवं साहित्य से परिचय कराया गया।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं अध्यापक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विद्याशंकर शुक्ल ने कहा कि सुब्रह्मण्य भारती भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता से लगाव रखने वाले एक ऐसे महान साहित्यकार थे जिन्होंने अपनी रचनाओं द्वारा भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को राष्ट्रीय भाषाओं से जोड़ने की कोशिश की।
कार्यक्रम का आरंभ करते हुए सूचना तथा भाषा प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. देवेंद्र शुक्ल ने सुब्रह्मण्य भारती की जन्म-जयंती पर आयोजित कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों की जानकारी देते हुए कहा कि भारती इतिहास के ऐसे दौर में सक्रिय हुए, जब लोग पराधीनता को सहने के लिए तैयार नहीं थे। भाषा और साहित्य को वे राष्ट्रीय चेतना और अस्मिता के साथ जोड़कर देखते थे। उन्होनें अपने साहित्य के माध्यम से सामाजिक, राजनीतिक, और सांस्कृतिक नवजागरण को न केवल सही दिशा दी बल्कि लोगों को संघर्ष के लिए प्रेरित किया।
इस समारोह के अध्यक्ष संस्थान के निदेशक प्रो. मोहन ने कहा कि मानव इतिहास में कुछ ऐसे लोग हुए हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा से पूरी विश्वचेतना को आलोकित किया है। सुब्रह्मण्य भारती ऐसी ही एक प्रतिभा थे। सुब्रह्मण्य भारती का व्यक्तित्व एवं कृतित्व बहुआयामी है। उन्होंने अभिव्यक्ति के लिए कई विधाओं, कई कलाओं और भाषाओं का प्रयोग किया। कविता, कहानी, नाटक, वैचारिक निबंध, अनुवाद आदि प्रत्येक क्षेत्र में अपने सृजन से साहित्य को समृद्ध किया।
उन्होनें बताया कि सुब्रह्मण्य की दृष्टि में साहित्य का उद्देश्य बहुत व्यापक था, वे भारतीय भाषाओं की राष्ट्रीय चेतना के आग्रही थे। इसी व्यापक उद्देश्य के अनुसार उन्होंने तमिल सहित सभी भारतीय भाषाओं के साहित्य को सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक क्रांति के साथ जोड़ने का आह्वान किया। इस दृष्टि से सुब्रह्मण्यम भारती को निस्संदेह राष्ट्र चेतना के महानायक कहा जा सकता है।
कार्यक्रम में संस्थान के नियमित छात्रों के साथ-साथ मैसूर से नवीकरण प्रशिक्षण हेतु आए प्रतिभागियों ने भी भाग लिया। इन छात्राध्यापकों ने सुब्रह्मण्य भारती के जीवन की घटनाओं का ज़िक्र किया और उनकी प्रतिनिधि रचनाओं का सस्वर पाठ किया।
इस अवसर पर भाषा प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा सुब्रह्मण्य भारती के जीवन और कृतित्व पर केंद्रित लघु फ़िल्म भी प्रदर्शित की गई।
कार्यक्रम के दौरान प्रो. हरिशंकर, प्रो. वीना शर्मा, डॉ. भरत सिंह परमार सहित विभिन्न विभागीय सदस्य मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संयोजन-संचालन प्रो. देवेंद्र शुक्ल ने और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अशोक मिश्र ने किया।