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गोपाल चतुर्वेदी

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गोपाल चतुर्वेदी का जन्म अगस्त, 1942 ई. में हुआ था। व्यंग्य को व्यवस्थागत विसंगतियों पर चोट करने का कारगर हथियार बनाकर संघर्ष करने की विरल लेखकीय पंरपरा में श्री गोपाल चतुर्वेदी का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है। अपनी हास्य-व्यंग्यपरक कृतियों के माध्यम से श्री चतुर्वेदी जहाँ एक तरफ़ जड़ हो चुके मूल्यों की शिनाख्त करते हैं, वहीं दूसरी तरफ़ उन्हीं उपकरणों से उस जड़ता को भंग कर विवेकशील चेतना के अविरल प्रवाह का मार्ग प्रशस्त करते हैं।


लेखन कार्य

श्री चतुर्वेदी ने भारत सरकार के अनेक महत्वपूर्ण मंत्रालयों में उच्च पदों पर कार्य करते हुए समानांतर रूप से अपने लेखकीय दायित्वों का पूर्ण समर्पण के साथ निर्वहन किया है। उन्होंने 'सारिका', 'इंडिया टुडे', 'नवभारत टाइम्स', 'हिंदुस्तान', 'दैनिक भास्कर' और 'साहित्य अमृत' जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में अनेक वर्षों तक नियमित स्तंभ लेखन कर अपनी लेखकीय सक्रियता को जीवंत रखा है।

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व्यंग्य संग्रह

अपनी व्यंग्य रचनाओं के लिए गोपाल चतुर्वेदी प्रसिद्ध हैं। उनके कुछ व्यंग्य संग्रह इस प्रकार हैं-

  • अफ़सर की मौत
  • दुम की वापसी
  • राम झरोखे बैठ के
  • फ़ाइल पढ़ी

पुरस्कार

अनेक विशिष्ट पुरस्कारों से सम्मानित श्री गोपाल चतुर्वेदी जैसे कृती व्यक्तित्व को 'सुब्रह्मण्यम भारती पुरस्कार' से सम्मानित करके 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' ने गर्व की अनुभूति की है।