रविवार, सित 22

  •  
  •  
आप यहाँ हैं:घर संगठन मंडल के पदाधिकारी अध्यक्ष हिंदी पुरस्कार महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार

राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार वर्ष 2008-09

वर्ष 2008 महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार से सम्मानित विद्वान
1.  प्रो. गोपाल राय gopal-ray
2.  डॉ. विमलेश कांति वर्मा vimlesh-kanti-verma
वर्ष 2009 महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार से सम्मानित विद्वान
1.  प्रो. हरिमोहन harimohan
2.  डॉ. विक्रम सिंह vikram-singh


 

विक्रम सिंह

vikram-singh

डॉ. विक्रम सिंह जी का जन्म जुलाई, 1960 ई. में हुआ था। एक साधारण किसान परिवार में इनका जन्म हुआ था। बाल्यकाल से लेकर प्रशासनिक सेवा के उच्चतर दायित्वों के निर्वाह तक डॉ. विक्रम सिंह अपने जीवन और लेखन के हर पड़ाव पर गहन श्रमशीलता और कर्मठता का पाठ रचते दिखाई देते हैं। देश-विदेश की अनेक संस्थाओं द्वारा विक्रम सिंह को सम्मानित किया जा चुका है।

रचना कार्य

अपने नाम पर दर्ज तमाम महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बावजूद जड़ और ज़मीन से एक निरंतर गहरा जुड़ाव विक्रम सिंह जी के विपुल रचना-कर्म में दिखाई देता है, जो कविता, कहानी, नाटक, यात्रा वृत्तांत, निबंध, आलोचना जैसी अनेक विधाओं में फैला हुआ है। अभी तक विभिन्न विधाओं में आपकी सत्रह पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं और अनेक प्रकाशनाधीन हैं। 'समय की सिलवटों से झाँकता इतिहास', 'सूरजः चाँदनी रात में', 'ताजमहल से टावरब्रिज' और 'नॉर्वेः द चैंपियन ऑफ़ वर्ल्ड पीस' आपके बहुचर्चित और पुरस्कृत यात्रा वृत्तांत हैं।

व्यक्तित्व

Hindi-sevi-samman-12

बहुआयामी रचनात्मक व्यक्तित्व के धनी डॉ. विक्रम सिंह भारतविद के रूप में भी जाने जाते हैं। इस रूप में भारत के सांस्कृतिक इतिहास का सचेत अध्ययन-अन्वेषण करते हुए वे अपने अध्ययन का फलक पुरातन परंपराओं की जटिल अंतग्रंथियों से लेकर समकालीन सामाजिक सरोकारों तक फैलाते हैं। विचारोत्तेजक लोकगंधी भाषा और स्वयंवदात्मक शैली में रचित डॉ. सिंह का लेखन भाषा, शिल्प और वस्तु रूप के नए प्रतिमान गढ़ने के बजाय सामाजिक जीवन से विलुप्त मानवीय संवेदना की वैज्ञानिक भावभूमि तैयार करने का प्रयत्न करता है।

पुरस्कार

विदेश विभाग के अवैतनिक हिंदी विशेषज्ञ और सलाहकार रह चुके डॉ. सिंह को देश-विदेश की अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है। अतीत के सुनहरे शब्दचित्रों से वैज्ञानिक भविष्य की इंद्रधनुषी संभावनाओं तक की उद्देश्यपूर्ण यात्राक्रम के अद्भुत चितेरे डॉ. विक्रम सिंह को हिंदी में उत्कृष्ट यात्रावृत्त लेखन के लिए 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' ने 'महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार' से सम्मानित किया है। इस सम्मान को प्रदान करते हुए संस्थान ने अत्यंत आनन्द का अनुभव किया है।

 

विमलेश कांति वर्मा

vimlesh-kanti-verma

डॉ. विमलेश कांति वर्मा ने पिछले चार दशकों से भी अधिक समय से निरंतर अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान, कोश निर्माण, पाठालोचन, अनुवाद और सांस्कृतिक अध्ययन के क्षेत्र में अपनी देश-विदेश में सशक्त उपस्थिति दर्ज़ कराई है।

शिक्षण विधियों का विकास

भारतीय लोकवार्ता और प्रवासी भारतीय हिंदी साहित्य के अध्ययन और अनुसंधान के अलावा विदेशी भाषा के रूप में हिंदी शिक्षण में आपकी विशेष रुचि रही है। डॉ. वर्मा ने विदेशियों के लिए हिंदी के विविध स्तरीय पाठ्यक्रमों का निर्माण करने के साथ-साथ प्रभावी शिक्षण विधियों का भी विकास किया और स्तरीकृत शिक्षण सामग्री भी तैयार की। आपने विशेषतः फ़िजी, मॉरिशस, सूरीनाम और दक्षिण अफ़्रीका में प्रवासी भारतीयों द्वारा रचे जा रहे सृजनात्मक हिंदी साहित्य की विशिष्ट भाषिक शैलियों पर गंभीर अध्ययन-अनुसंधान किया है। आपने बल्ग़ारियन भाषा की अनेक कालजयी कृतियों का हिंदी में अनुवाद किया है, जिसके लिए बल्ग़ारिया की सरकार की ओर से आपको दो प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किए गए।

vimlesh-kanti-verma-kapil-sibbal-mohan-ji

हिन्दी का प्रचार-प्रसार

हिंदी के अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार का दृढ़ संकल्प लिए डॉ. विमलेश कांति वर्मा टोरंटो विश्वाविद्यालय, कनाडा; सोफ़िया विश्वरविद्यालय, बल्ग़ारिया और साउथ पेसिफ़िक विश्वाविद्यालय, फ़िजी में हिंदी भाषा और साहित्य का अध्यापन और विदेशी हिंदी शिक्षकों के प्रशिक्षण के अलावा विभिन्न विश्व हिंदी सम्मेलनों और क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलनों में सक्रिय सहभागिता कर चुके हैं। भारतीय राजनयिक के तौर पर आप फ़िजी स्थित भारतीय उच्चायोग में प्रथम सचिव (हिंदी और शिक्षा) के महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वाह कर चुके हैं।

पुरस्कार व सम्मान

अनेक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों और सम्मानों से अलंकृत हिंदी के समर्पित शिक्षक-यायावर डॉ. विमलेश कांति वर्मा को 'महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार' प्रदान करते हुए 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' ने अपार हर्ष और आनंद का अनुभव किया है।

 

हरिमोहन

harimohan

प्रो. हरिमोहन जी का जन्म फ़रवरी, 1953 ई. में हुआ था। लोककवि घाघ की मौसम संबंधी कहावतों और काव्योक्तियों का वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत कर साहित्यिक अनुसंधान का एक नया आयाम स्थापित करने वाले प्रो. हरिमोहन का लेखन बहुआयामी है। इन्होंने हिंदी की अनेकों विधाओं पर अपनी कलम चलाई है। इनके अमूल्य योगदान से प्रेरित होकर इन्हें एक दर्जन से भी अधिक सम्मान और पुरस्कार प्रदान किये गए हैं।

रचना कार्य

आपने कविता, कहानी, उपन्यास आदि विभिन्न विधाओं में सृजनात्मक और आलोचनात्मक साहित्य लेखन के समानांतर प्रयोजनमूलक हिंदी, पत्रकारिता और जनसंचार, सूचना तथा भाषा प्रौद्योगिकी जैसे नये विषयों पर साधिकार क़लम चलाई है। अब तक विभिन्न विषयों पर आपकी 38 कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं।
डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के प्रतिष्ठित कन्हैयालाल माणिक मुंशी हिंदी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ के निदेशक के रूप में कार्यरत प्रो. हरिमोहन के कृतित्व पर विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों द्वारा अब तक तीन पी.एच.डी और दस एम.फ़िल स्तरीय शोधकार्य संपन्न किए जा चुके हैं।

Hindi-sevi-samman-8

सम्मान और पुरस्कार

हरिमोहन जी को सूचना तथा प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से 'भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार', पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से 'राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार' सहित उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ओर से 'विश्वविद्यालय स्तरीय शिक्षक सम्मान', 'बाबू श्याम सुंदर दास पुरस्कार', 'बाबूराव विष्णु पराडकर पुरस्कार', 'सच्चिदानंद हीराचंद वात्स्यायन अज्ञेय पुरस्कार', भारतीय विद्या भवन की ओर से 'सर्वपल्ली राधाकृष्णन पुरस्कार' और मॉरिशस हिंदी अकादमी की ओर से 'साहित्यभूषण' इत्यादि की एक दर्जन से भी अधिक स्तरीय सम्मान और पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।
हिमालय की गुरु-गंभीर सांस्कृतिक चेतना से गंगा-जमुनी सभ्यता की तरल-सरल लोक संवेदना तक विस्तृत लैंडस्केप पर प्रकृति-पर्यावरण और लोक-चेतना के शोधपरक आख्यान रचने वाले प्रो. हरिमोहन को उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए 'महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार' से सम्मानित करते हुए 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' ने अपार हर्ष का अनुभव किया है।

 


गोपाल राय

gopal-ray

प्रो. गोपाल राय का जन्म जुलाई, 1932 ई. में हुआ था। एक यायावर पर्यटक के संघर्ष और फक्कड़पन को अपने व्यक्तित्व में जीवंत किए पटना विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर गोपाल राय हिंदी के वरिष्ठतम आलोचकों की पंक्ति में अग्रगण्य हैं।

रचना कार्य

पिछले पचास वर्ष की लंबी साहित्यिक यात्रा में गोपाल राय ने हिंदी कहानी और उपन्यास के व्यापक फलक को अपनी तत्वदर्शी समीक्षादृष्टि से समृद्ध किया है। 'हिंदी कहानी का इतिहास', 'हिंदी उपन्यास का इतिहास', 'उपन्यास का शिल्प', 'उपन्यास की संरचना' जैसे अनेक विषयों पर केंद्रित गंभीर आलोचनात्मक कार्य के साथ-साथ दो खंडों में प्रकाशित 'हिंदी उपन्यास कोश' और चौदह खंडों के विशाल 'हिंदी साहित्याब्द कोश' आपकी निरंतरगामी सृजनशीलता के परिचायक हैं।

संपादक

हिंदी जगत में प्रोफ़ेसर गोपाल राय को साहित्यिक समालोचना की अग्रणी पत्रिका 'समीक्षा' के संपादक के तौर पर भी पहचाना जाता है, जिसने हिंदी में न केवल साहित्यिक पत्रकारिता की कई उत्कृष्ट परंपराओं को स्थापित किया, बल्कि अपने समय की साहित्यिक सूझ और समझ को भी गहराई से जाँचा और परखा। हिंदी में शोध कर्म की स्तरीयता और प्रामाणिकता के लिए निरंतर कटिबद्ध प्रोफ़ेसर गोपाल राय का अवदान अकादमिक और साहित्यि‍क जगत में समान रूप से स्वीकृत है। आप हिंदी के विकास से जुड़ी अनेक उच्च स्तरीय सरकारी और ग़ैर सरकारी संस्थाओं की समितियों से संबद्ध रहे हैं।

Hindi-sevi-samman-3

पुरस्कार

'एकला चलो रे' के कर्मठ संकल्पबोध के साथ निरंतर सक्रिय और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिष्ठित पुरस्कारों से अनेक बार सम्मानित गोपाल राय को उनकी लंबी साहित्यि‍क यात्रा के लिए 'महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार' अर्पित करते हुए 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' कृतज्ञता का अनुभव कर रहा है।