रविवार, अग 25

  •  
  •  

विमलेश कांति वर्मा

vimlesh-kanti-verma

डॉ. विमलेश कांति वर्मा ने पिछले चार दशकों से भी अधिक समय से निरंतर अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान, कोश निर्माण, पाठालोचन, अनुवाद और सांस्कृतिक अध्ययन के क्षेत्र में अपनी देश-विदेश में सशक्त उपस्थिति दर्ज़ कराई है।

शिक्षण विधियों का विकास

भारतीय लोकवार्ता और प्रवासी भारतीय हिंदी साहित्य के अध्ययन और अनुसंधान के अलावा विदेशी भाषा के रूप में हिंदी शिक्षण में आपकी विशेष रुचि रही है। डॉ. वर्मा ने विदेशियों के लिए हिंदी के विविध स्तरीय पाठ्यक्रमों का निर्माण करने के साथ-साथ प्रभावी शिक्षण विधियों का भी विकास किया और स्तरीकृत शिक्षण सामग्री भी तैयार की। आपने विशेषतः फ़िजी, मॉरिशस, सूरीनाम और दक्षिण अफ़्रीका में प्रवासी भारतीयों द्वारा रचे जा रहे सृजनात्मक हिंदी साहित्य की विशिष्ट भाषिक शैलियों पर गंभीर अध्ययन-अनुसंधान किया है। आपने बल्ग़ारियन भाषा की अनेक कालजयी कृतियों का हिंदी में अनुवाद किया है, जिसके लिए बल्ग़ारिया की सरकार की ओर से आपको दो प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किए गए।

vimlesh-kanti-verma-kapil-sibbal-mohan-ji

हिन्दी का प्रचार-प्रसार

हिंदी के अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार का दृढ़ संकल्प लिए डॉ. विमलेश कांति वर्मा टोरंटो विश्वाविद्यालय, कनाडा; सोफ़िया विश्वरविद्यालय, बल्ग़ारिया और साउथ पेसिफ़िक विश्वाविद्यालय, फ़िजी में हिंदी भाषा और साहित्य का अध्यापन और विदेशी हिंदी शिक्षकों के प्रशिक्षण के अलावा विभिन्न विश्व हिंदी सम्मेलनों और क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलनों में सक्रिय सहभागिता कर चुके हैं। भारतीय राजनयिक के तौर पर आप फ़िजी स्थित भारतीय उच्चायोग में प्रथम सचिव (हिंदी और शिक्षा) के महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वाह कर चुके हैं।

पुरस्कार व सम्मान

अनेक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों और सम्मानों से अलंकृत हिंदी के समर्पित शिक्षक-यायावर डॉ. विमलेश कांति वर्मा को 'महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार' प्रदान करते हुए 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' ने अपार हर्ष और आनंद का अनुभव किया है।