मंगलवार, फरव 18

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नियमित अध्यापक शिक्षा पाठ्यक्रम सत्र 2018-19 मुख्य परीक्षा परिणाम

MAIN EXAM RESULT, SESSION 2018-19 OF KHS TEACHERS EDUCATION DEPARTMENT


 

हिंदी शिक्षण निष्णात -प्रथम वर्ष / Hindi Shikshan Nishnat - I Year

हिंदी शिक्षण निष्णात - द्वितीय वर्ष / Hindi Shikshan Nishnat - II Year

हिंदी शिक्षण पारंगत - प्रथम वर्ष / Hindi Shikshan Parangat - I Year

हिंदी शिक्षण पारंगत - द्वितीय वर्ष / Hindi Shikshan Parangat - II Year

हिंदी शिक्षण पारंगत - द्वितीय वर्ष गुवाहाटी / Hindi Shikshan Parangal - II Year Guwahati

हिंदी शिक्षण प्रवीण - प्रथम वर्ष / Hindi Shikshan Praveen - I Year

हिंदी शिक्षण प्रवीण - द्वितीय वर्ष / Hindi Shikshan Praveen - II Year

त्रिवर्षीय हिंदी शिक्षक डिप्लोमा (नागालैंड) - प्रथम वर्ष / 3Years  Hindi Teachers Diploma (Nagaland) - I Year

त्रिवर्षीय हिंदी शिक्षक डिप्लोमा (नागालैंड) - द्वितीय वर्ष / 3Years  Hindi Teachers Diploma (Nagaland) - II Year

त्रिवर्षीय हिंदी शिक्षक डिप्लोमा (नागालैंड) - तृतीय वर्ष / 3Years  Hindi Teachers Diploma (Nagaland) - III Year

विशेष गहन हिंदी शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम (दीमापुर) / Special Intensive Hindi Teachers Training Course (Dimapur)


 

 

माननीय विदेश राज्यमंत्री जनरल (डॉ.) वी.के. सिंह (रिटा.) का संस्थान आगमन, नवनिर्मित भव्य प्रवेश द्वार : 'मोटूरि सत्यनारायण द्वार' का उद्घाटन एवं अं.हिं.शि. पाठ्यक्रम सत्र 2018-19 का शुभारंभ

(फोटो एलबम देखें)

दिनांक 17 अक्टूबर, 2018 दिन बुधवार को पूर्वाह्न में केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के नवनिर्मित मुख्य प्रवेश द्वार का उद्घाटन केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री माननीय जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह (रिटायर्ड) के कमलों से संपन्न हुआ। मुख्य प्रवेश द्वार के उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के उपाध्यक्ष डॉ. कमल किशोर गोयनका और केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय उपस्थित थे। साथ ही संस्थान के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं स्वदेशी-विदेशी छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे। सर्वप्रथम डॉ. कमल किशोर गोयनका और प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय ने पुष्पगुच्छ भेंट कर माननीय मंत्री महोदय का प्रवेश द्वार पर स्वागत किया। तत्पश्चात स्वदेशी-विदेशी छात्राओं ने चंदन का तिलक कर और पुष्प वर्षा से मंत्री महोदय का स्वागत किया।
केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के मुख्य प्रवेश द्वार का नाम संस्थान के संस्थापक पद्मभूषण मोटूरि सत्यनारायण के नाम पर रखा गया है। इस प्रवेश द्वार का निर्माण केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय के अथक प्रयासों से संपन्न हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग के सत्र 2018-19 का शुभारंभ
केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के नवनिर्मित मुख्य प्रवेश द्वार के उद्घाटन के उपरांत माननीय विदेश राज्य मंत्री जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह द्वारा अंतरराष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग के सत्र 2018-19 का औपचारिक शुभारंभ संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि माननीय मंत्री महोदय थे और विशिष्ट अतिथि के रूप में आगरा के महापौर श्री नवीन जैन उपस्थित थे। साथ ही मंच पर केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के उपाध्यक्ष डॉ. कमल किशोर गोयनका और केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय उपस्थित थे। अतिथि के रूप में माननीय विधायक श्री जगन प्रसाद गर्ग और डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अरविंद दीक्षित जी सभागार में उपस्थित थे।
अटल बिहारी वाजपेयी अंतरराष्ट्रीय सभागार में मंच पर अतिथियों द्वारा स्थान ग्रहण करने पर सर्व प्रथम माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन किया गया। इसके साथ ही विदेशी छात्राओं द्वारा दीपोज्योति मंत्र का उच्चारण किया गया। दीपोज्योति मंत्र का उच्चारण करने वाली छात्राएँ- श्रीलंका से हसन्ति, निमेषा, कलणि, संदुनि, हिमाली, रसांगी, पोलैंड से अन्ना, त्रिनिडाड से नरेंद्र और सूरीनाम से प्रशांत थे। इसके उपरांत विदेशी छात्र-छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। सरस्वती वंदना प्रस्तुत करने वाले छात्र थे- चतुरंगी, दिमुतु, मयूरी, सुलोचना- श्रीलंका से तथा जयपान तशनाई- थाईलैंड से और मिशेल- कैमरुन एवं नारान- मंगोलिया से।
इसके उपरांत उत्तरीय, श्रीफल और पुष्पगुच्छ भेंट कर मंचस्थ अतिथियों का स्वागत किया गया। केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय ने उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने अपने स्वागत भाषण में संस्थान की रूपरेखा और कार्य पद्धति का परिचय दिया। निदेशक महोदय ने कहा कि संस्थान के लिए सौभाग्य का क्षण है कि संस्थान को एक भव्य द्वार मिला है। यह द्वार एडसिल (EDCIL) द्वारा निर्मित किया गया है। उन्होंने कहा कि रिटायर्ड जनरल और भारत के विदेश राज्य मंत्री ने संस्थान के अनुरोध को स्वीकर किया, यह संस्थान के लिए गर्व का विषय है। अपने वक्तव्य में निदेशक महोदय ने कहा कि संविधान सभा के सदस्य और प्रयोजन मूलक हिंदी को बढ़ावा देने वाले मोटूरि सत्यनारायण ने इस संस्थान की स्थापना की और विशेष बात यह है कि दक्षिण भारत के एक बुद्धिजीवी ने संस्थान की स्थापना के लिए आगरा को चुना। उन्होंने कहा कि अब तक लगभग 5200 विदेशी विद्यार्थियों ने संस्थान से विभिन्न प्रकार की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। विदेशी विद्यार्थी विश्वभर में हिंदी की सेवा कर रहे हैं। निदेशक महोदय ने कहा कि संस्थान के इतिहास में पहली बार सबसे अधिक देशों के और सबसे अधिक संख्या में विदेशी छात्र हिंदी पढ़ने आये हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान से 08 शोध पत्रिकाएँ प्रकाशित हो रही हैं और देशभर की 50 लघु पत्रिकाओं को 50-50 हजार रुपये का अनुदान प्रतिवर्ष दिया जाता है। साथ ही भारत की क्षेत्रीय भाषाओं में 50 अध्येता कोश बनाने का कार्य चल रहा है जिनमें से 28 अध्येता कोश बनकर तैयार हो गए हैं। साथ ही 16 भागों में एक विश्वकोश तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 28 देशों के विद्यार्थी आगरा और 16 देशों के विद्यार्थी दिल्ली केंद्र पर अध्ययन हेतु अलग-अलग देशों से आए हैं।
प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय के स्वागत भाषण के बाद अंतरराष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गंगाधर वानोडे ने विभाग की ओर से प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने विभाग के पाठ्यक्रमों और विदेशी विद्यार्थियों के देशों और उनकी संख्या का विवरण प्रस्तुत किया।
इसके उपरांत स्वदेशी-विदेशी विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। श्रीलंका की चतुरंगी, दिमुतु, सुलोचना, मयूरी तथा थाईलैंड की ताशनाई, मंगोलिया की नारान एवं कैमरून की मिशेल ने सारे जहां से अच्छा गीत प्रस्तुत किया। रूबी रॉय (असम), जयंती डुगुंरी, गौरीमुर्मु (ओडिसा), निओती, केसीगंले, रेनाआने, एच. तोतसंगला (नागालैंड) की छात्राओं ने ‘जो भी सुन ले तेरा हो ले’- कृष्ण भजन प्रस्तुत किया। इसके बाद खिमोला, काजंगले, हमसाई वंगथंगलो, जेलिना (नागालैंड) और तोपी, अंजोली, तोरी (अरुणाचल प्रदेश) की छात्राओं ने नागा नृत्य प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंत में स्वेता (अर्मेनिया), पाकीजा (बांग्लादेश), लोको, ड्यूला, नेयमिक (कैमरून), इरीना (यूक्रेन), बेल (फिलीपिंस), रयोता (जापान), बेजरिया, युवारत्न, बुरानिस (थाईलैंड), दियाना (बुल्गारिया), मिरेला (रोमानिया), आमीर (बांग्लादेश) के छात्र-छात्राओं ने डांडिया कृष्ण रास प्रस्तुत किया। इसमें कृष्ण बांग्लादेश का छात्र आमीर और राधा रोमानिया की छात्रा मिरेला थी।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के उपाध्यक्ष प्रो. कमल किशोर गोयनका ने अपने भाषण में कहा कि पूर्व जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह हिंदी भाषा के प्रति गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्ष में संस्थान की कार्य पद्धति और इसकी संरचना में अद्भुत परिवर्तन आया है। उन्होंने संस्थान में आने के लिए माननीय मंत्री जी का आभार व्यक्त किया।
विशिष्ट अतिथि आगरा शहर के वर्तमान महापौर श्री नवीन जैन ने विदेशी विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को यादगार क्षण बताया और कहा कि जीवन में प्रथम बार इस प्रकार की अद्भुत सांस्कृतिक प्रस्तुति देखी है। इन विदेशी विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति की धारा को जीवंत कर दिया है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और माननीय जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह (रिटा.) ने अपने वक्तव्य में कहा कि संस्थान में आकर मैं गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ। उन्होंने हिंदी भाषा के विषय में कहा कि हिंदी राजभाषा ही नहीं, हिंदी जनभाषा है। उन्होंने कहा कि सेना में पूरे देश के जवान हैं, इसलिए सेना की भाषा हिंदी है। यह बहुत सौभाग्य की बात है कि डॉ. मोटूरि सत्यनारायण ने दक्षिण से आकर आगरा में हिंदी के लिए कार्य किया। उन्होंने प्रयोजन मूलक हिंदी को बढ़ावा दिया। संस्थान का मुख्य प्रवेश द्वार डॉ. मोटूरि सत्यनारायण के नाम पर बनाया गया है यह गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि इस संस्थान को सुंदर बनाने का कार्य होना चाहिए ताकि यह विश्व की सबसे सुंदर संस्था बन सके।
कार्यक्रम की समाप्ति पर धन्यवाद ज्ञापन की औपचारिकता डॉ. ज्योत्स्ना रघुवंशी द्वारा संपन्न की गयी। कार्यक्रम का संचालन भी डॉ. ज्योत्स्ना रघुवंशी द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में आगरा के अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। संस्थान के सभी शिक्षक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

अखिल भारतीय राजभाषा संगोष्ठी पोर्टब्लेयर

मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दिनांक 31 जनवरी और 01 फरवरी, 2019 के दौरान पोर्ट ब्लेयर की धरती पर दो-दिवसीय अखिल भारतीय राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन संपन्न हुआ। संगोष्ठी का प्रायोजन मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत शैक्षणिक संस्था केंद्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा ने किया। मंत्रालय के अंतर्गत संचालित देश भर में स्थित विभिन्न कार्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों के राजभाषा अधिकारी, हिन्दी अनुवादक, संस्थाओं के निदेशक तथा वरिष्ठ अधिकारीगण, विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं हिन्दी विद्वानों ने इस संगोष्ठी में सहभागिता की। संगोष्ठी का उद्घाटन 31 जनवरी को टैगोर राजकीय शिक्षा महाविद्यालय, पोर्ट ब्लेयर के टैगोर ऑडीटोरियम में संपन्न हुआ। गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन किया, इसके बाद महाविद्यालय की छात्राओं ने अतिथियों के सम्मान में स्वागत गान एवं एक निकोबारी गीत प्रस्तुत किया।


संगोष्ठी में आए अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार की निदेशक (राजभाषा) श्रीमती सुनीति शर्मा ने कहा कि भारत के वीर क्रांतिकारियों की धरती अण्डमान और निकोबार की राजधानी में राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन अनेक दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। यह देश के सीमांत में समुद्र के बीच स्थित यह सुंदर द्वीप भूमि प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ राजभाषा के कार्यान्वयन की दृष्टि से भी विशिष्ट है। इसलिए यहाँ पर इस संगोष्ठी का आयोजन प्रतिभागियों को राजभाषा के कार्यान्वयन की सकारात्मक प्रेरणा प्रदान करेगा।
इस संगोष्ठी का औपचारिक उद्घाटन श्री प्रकाश जावडेकर, माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री, भारत सरकार के वीडियो शुभकामना संदेश के साथ किया गया। भारतीय प्रबंधन संस्थान, रायपुर के निदेशक प्रोफेसर भारत भास्कर एवं टैगोर महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. आर.के.तिवारी ने राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार और कार्यान्वयन के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए। केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के प्रतिनिधि प्रोफेसर हरिशंकर ने हिन्दी के बहुआयामी संवर्धन के लिए संस्थान द्वारा किए जाने वाले कार्यों का परिचय दिया। मुख्य अतिथि के रूप में पधारे बाबा साहेब अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति प्रोफेसर नीलमणि प्रसाद वर्मा ने राजभाषा के काम-काज को व्यापक जन-सरोकारों के साथ जोड़ने पर बल दिया और राजभाषा के साथ-साथ हिन्दी की राष्ट्रभाषा के रूप में भूमिका पर भी चर्चा किए जाने की बात कही। अंत में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निदेशक (स्कूल शिक्षा) श्री एम.एस. रवि ने राजभाषा संगोष्ठी के आयोजन एवं इसके उद्देश्यों की सराहना करते हुए सभी गणमान्य अतिथि एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
उद्घाटन के उपरांत तीन अकादमिक सत्रों का आयोजन किया गया। पहले दो सत्रों के विषय थे- ‘सरकार की राजभाषा नीतिः संवैधानिक उपबंध, वार्षिक कार्यक्रम एवं तिमाही रिपोर्ट’ और ‘संसदीय राजभाषा समिति की निरीक्षण प्रश्नावली’। इन विषयों पर श्रीमती सुनीति शर्मा, निदेशक (राजभाषा), मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने प्रस्तुति दी और प्रतिभागियों की समस्याओं एवं शंकाओं का समाधान किया। तीसरा तकनीकी सत्र ‘राजभाषा हिन्दी के कार्यान्वयन में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका’ पर केंद्रित था जिसकी प्रस्तुति केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के सहायक प्रोफेसर श्री अनुपम श्रीवास्तव ने की। इस तकनीकी सत्र की अध्यक्षता एन.आई.आई.टी. के असोसिएट प्रोफेसर डॉ. एन.के. मेहता ने की।
संगोष्ठी के दूसरे दिन तीन अकादमिक सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र का विषय था- सरकारी कार्यालयों में राजभाषा हिन्दी का प्रयोग, जिसपर अण्डमान प्रशासन की पूर्व हिन्दी अधिकारी एवं उप सचिव सुश्री अनस्तासिया ने विचार व्यक्त किए। सत्र की अध्यक्षता डॉ जय नारायण नायक, कुलसचिव नेहू, शिलांग ने की। दूसरे सत्र में ‘वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग द्वारा प्रकाशित शब्दावली, शब्द-निर्माण, आदि’ विषय पर आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर अवनीश कुमार ने प्रस्तुति दी। इस सत्र के अध्यक्ष प्रोफेसर नीलमणि प्रसाद वर्मा रहे। तीसरा सत्र ‘सुयोग्य लिप्यांतरण से राजभाषा एवं अन्य भाषाओं के मध्य गुणात्मक संबंध स्थापना’ पर केंद्रित था जिसे आई.आई.टी. खड़गपुर के राजभाषा विभागाध्यक्ष प्रोफेसर वी.आर. देसाई ने प्रस्तुत किया।
शैक्षिक सत्रों के बाद कार्यालयों में राजभाषा अधिनियम एवं नियमों का अनुपालनः प्रशासनिक प्रधान/राजभाषा कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष के रूप में दायित्व विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसमें प्रोफेसर नीलमणि प्रसाद वर्मा, प्रोफेसर अवनीश कुमार, डॉ. के.एल. सरकार (कार्यकारी निदेशक एडसिल, नोएडा), डॉ. संजय कुमार सिंह (संयुक्त निदेशक एन.आई.ओ.एस., नोएडा), प्रेम कुमार चोपड़ा (कुलसचिव आई.आई.टी., गुजरात), बी.एन. चौधरी (कुलसचिव आई.आई.टी., मेघालय) एवं प्रोफेसर जगदेव कुमार शर्मा (लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ, दिल्ली) ने सहभागिता की। परिचर्चा सत्र की अध्यक्षता सुनीति शर्मा, निदेशक (राजभाषा) द्वारा की गई।
सत्रों की कार्यवाही का संचालन श्री अनुपम श्रीवास्तव ने किया। केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के प्रोफेसर हरिशंकर ने संगोष्ठी की कार्यवाही का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
निदेशक (राजभाषा) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ।

हिंदी सौ रत्नमाला पुस्तक निर्माण योजना

 

हिंदी सौ रत्नमाला पुस्तक निर्माण श्रृंखला

केंद्रीय हिंदी संस्थान करेगा हिंदी के सौ प्रतिनिधि साहित्यकारों की पुस्तकों का निर्माण

कार्यशाला दिनांक 08 अगस्त, 2018 का प्रतिवेदन । फोटो एलबम ।

केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के पू्र्वोत्तर शिक्षण सामग्री निर्माण विभाग के संयोजन में आयोजित एक-दिवसीय हिंदी सौ रत्‍नमाला पुस्‍तक निर्माण कार्यशाला में देश के वरिष्ठ हिंदी विद्वान शिक्षकों ने एकजुट होकर विचार मंथन किया। कार्यशाला का उद्घाटन सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण कर संस्थान के निदेशक प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय एवं साहित्य अकादमी के हिंदी सलाहकार प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित ने किया। आमंत्रित अतिथियों का स्वागत शैक्षिक समन्वयक प्रो. हरिशंकर एवं कार्यशाला संयोजक तथा पूर्वोत्तर सामग्री नि्र्माण विभाग के अध्यक्ष प्रो. उमापति दीक्षित ने किया।

अपने उद्घाटन वक्तव्य में प्रो. पाण्डेय ने कहा कि हिंदी साहित्य की लगभग एक हज़ार साल लंबी परंपरा में जितने ऊर्जावान हस्ताक्षर हैं, उन सबका अपना विशिष्ट स्थान है किंतु साहित्य और समाज के लिए दीर्घकालिक महत्व रखने वाले रचनाकारों का चुनाव और उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रामाणिक एवं सारगर्भित तरीके से पुस्तक लेखन श्रृंखला का आयोजन करना अपने-आप में एक बड़ा चुनौती और ज़िम्मेदारी भरा कार्य है। सौ रत्नमाला के अंतर्गत जिन सौ प्रतिनिधि साहित्यकारों पर पुस्तक निर्माण की योजना का आरंभ केंद्रीय हिंदी संस्थान ने किया है, उनकी व्यापक साहित्यिक महत्ता एवं अकादमिक उपादेयता है। ये पुस्तकें सामान्य हिंदी पाठकों से लेकर उच्च शिक्षा में संलग्न शिक्षार्थियों एवं शिक्षकों तक सबके लिए उपयोगी हों, ऐसा प्रयास किया जाना चाहिए। यह एक बड़ी योजना है और इसका निर्वाह करने के लिए समवेत प्रयासों की अपेक्षा है। इसे सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए चरणबद्ध ढंग से लक्ष्य निर्धारण एवं कार्य संपादन करने की आवश्यकता है।

प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित ने सौ रत्नमाला श्रृंखला के अंतर्गत चयनित रचनाकारों के नाम चयन की व्यापक संकल्पना और पृष्ठभूमि को स्पष्ट किया। उनका कहना था कि एक बार में दस-दस रचनाकारों का लक्ष्य लेकर कार्य आगे बढ़ाना चाहिए। जब एक चरण का कार्य एक निश्चित सीमा तक पहुँच जाए, तब अगले चरण के रचनाकारों का कार्य आरंभ करना उचित होगा। इस प्रकार निर्धारित समय में सौ रत्नमाला श्रृंखला को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकेगा।

लखनऊ विश्वविद्यालय से आए प्रो. पवन अग्रवाल ने संस्थान के प्रकाशन कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि केंद्रीय हिंदी संस्थान के अध्येता कोश और शोध पत्रिकाएँ जिस प्रकार बहुभाषिक एवं सांस्कृतिक समन्वय, राष्ट्रीय एकीकरण तथा शैक्षिक उन्नयन में योगदान दे रहे हैं, उसी प्रकार हिंदी साहित्य के विभिन्न कालखण्डों से चयनित प्रतिनिधि रचनाकारों पर आधारित पुस्तक निर्माण की यह योजना भी अपना राष्ट्रीय महत्व सिद्ध करेगी।

गहन विचार-विमर्श के बाद पहले चरण में पुस्तक निर्माण के लिए गोरखनाथ, विद्यापति, कबीरदास, तुलसीदास, सूरदास, जयशंकर प्रसाद, मैथिलीशरण गुप्त, प्रेमचंद, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' और आचार्य रामचंद्र शुक्ल के नाम तय किए गए। इन रचनाकारों के जीवन, व्यक्तित्व एवं कृतित्व से संबंधित विषयों पर आलेख लिखने के लिए उपयुक्त विद्वानों को जोड़ा जाएगा तदुपरांत इनका संयोजन संपादन कर पुस्तक रूप प्रदान किया जाएगा। आगामी विश्व पुस्तक मेला से पूर्व पहले चरण का कार्य प्रकाशित किए जाने का संकल्प लिया गया।

कार्यशाला में लखनऊ से प्रो. हरिशंकर मिश्र तथा प्रो. अलका पाण्डेय, इलाहाबाद से प्रो. रामकिशोर शर्मा, प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह तथा प्रो. निर्मला अग्रवाल, गया से प्रो. भरत सिंह, दिल्ली से प्रो. कैलाश नारायण तिवारी तथा प्रो. चंदन कुमार, गुवाहाटी से प्रो. दिलीप कुमार मेधी, जोधपुर से डॉ. नरेन्द्र मिश्र, मुंबई से डॉ. श्याम सुंदर पाण्डेय, कोच्चि से प्रो. एन.जी. देवकी एवं केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा से सूचना तथा भाषा प्रौद्योगिकी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर अनुपम श्रीवास्तव, मुनीशा पाराशर, डॉ. उमेश चंद्र सम्मिलित हुए। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. उमापति दीक्षित ने किया।


 

 

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