रविवार, सित 20

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मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दिनांक 31 जनवरी और 01 फरवरी, 2019 के दौरान पोर्ट ब्लेयर की धरती पर दो-दिवसीय अखिल भारतीय राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन संपन्न हुआ। संगोष्ठी का प्रायोजन मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत शैक्षणिक संस्था केंद्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा ने किया। मंत्रालय के अंतर्गत संचालित देश भर में स्थित विभिन्न कार्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों के राजभाषा अधिकारी, हिन्दी अनुवादक, संस्थाओं के निदेशक तथा वरिष्ठ अधिकारीगण, विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं हिन्दी विद्वानों ने इस संगोष्ठी में सहभागिता की। संगोष्ठी का उद्घाटन 31 जनवरी को टैगोर राजकीय शिक्षा महाविद्यालय, पोर्ट ब्लेयर के टैगोर ऑडीटोरियम में संपन्न हुआ। गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन किया, इसके बाद महाविद्यालय की छात्राओं ने अतिथियों के सम्मान में स्वागत गान एवं एक निकोबारी गीत प्रस्तुत किया।


संगोष्ठी में आए अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार की निदेशक (राजभाषा) श्रीमती सुनीति शर्मा ने कहा कि भारत के वीर क्रांतिकारियों की धरती अण्डमान और निकोबार की राजधानी में राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन अनेक दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। यह देश के सीमांत में समुद्र के बीच स्थित यह सुंदर द्वीप भूमि प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ राजभाषा के कार्यान्वयन की दृष्टि से भी विशिष्ट है। इसलिए यहाँ पर इस संगोष्ठी का आयोजन प्रतिभागियों को राजभाषा के कार्यान्वयन की सकारात्मक प्रेरणा प्रदान करेगा।
इस संगोष्ठी का औपचारिक उद्घाटन श्री प्रकाश जावडेकर, माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री, भारत सरकार के वीडियो शुभकामना संदेश के साथ किया गया। भारतीय प्रबंधन संस्थान, रायपुर के निदेशक प्रोफेसर भारत भास्कर एवं टैगोर महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. आर.के.तिवारी ने राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार और कार्यान्वयन के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए। केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के प्रतिनिधि प्रोफेसर हरिशंकर ने हिन्दी के बहुआयामी संवर्धन के लिए संस्थान द्वारा किए जाने वाले कार्यों का परिचय दिया। मुख्य अतिथि के रूप में पधारे बाबा साहेब अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति प्रोफेसर नीलमणि प्रसाद वर्मा ने राजभाषा के काम-काज को व्यापक जन-सरोकारों के साथ जोड़ने पर बल दिया और राजभाषा के साथ-साथ हिन्दी की राष्ट्रभाषा के रूप में भूमिका पर भी चर्चा किए जाने की बात कही। अंत में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निदेशक (स्कूल शिक्षा) श्री एम.एस. रवि ने राजभाषा संगोष्ठी के आयोजन एवं इसके उद्देश्यों की सराहना करते हुए सभी गणमान्य अतिथि एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
उद्घाटन के उपरांत तीन अकादमिक सत्रों का आयोजन किया गया। पहले दो सत्रों के विषय थे- ‘सरकार की राजभाषा नीतिः संवैधानिक उपबंध, वार्षिक कार्यक्रम एवं तिमाही रिपोर्ट’ और ‘संसदीय राजभाषा समिति की निरीक्षण प्रश्नावली’। इन विषयों पर श्रीमती सुनीति शर्मा, निदेशक (राजभाषा), मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने प्रस्तुति दी और प्रतिभागियों की समस्याओं एवं शंकाओं का समाधान किया। तीसरा तकनीकी सत्र ‘राजभाषा हिन्दी के कार्यान्वयन में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका’ पर केंद्रित था जिसकी प्रस्तुति केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के सहायक प्रोफेसर श्री अनुपम श्रीवास्तव ने की। इस तकनीकी सत्र की अध्यक्षता एन.आई.आई.टी. के असोसिएट प्रोफेसर डॉ. एन.के. मेहता ने की।
संगोष्ठी के दूसरे दिन तीन अकादमिक सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र का विषय था- सरकारी कार्यालयों में राजभाषा हिन्दी का प्रयोग, जिसपर अण्डमान प्रशासन की पूर्व हिन्दी अधिकारी एवं उप सचिव सुश्री अनस्तासिया ने विचार व्यक्त किए। सत्र की अध्यक्षता डॉ जय नारायण नायक, कुलसचिव नेहू, शिलांग ने की। दूसरे सत्र में ‘वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग द्वारा प्रकाशित शब्दावली, शब्द-निर्माण, आदि’ विषय पर आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर अवनीश कुमार ने प्रस्तुति दी। इस सत्र के अध्यक्ष प्रोफेसर नीलमणि प्रसाद वर्मा रहे। तीसरा सत्र ‘सुयोग्य लिप्यांतरण से राजभाषा एवं अन्य भाषाओं के मध्य गुणात्मक संबंध स्थापना’ पर केंद्रित था जिसे आई.आई.टी. खड़गपुर के राजभाषा विभागाध्यक्ष प्रोफेसर वी.आर. देसाई ने प्रस्तुत किया।
शैक्षिक सत्रों के बाद कार्यालयों में राजभाषा अधिनियम एवं नियमों का अनुपालनः प्रशासनिक प्रधान/राजभाषा कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष के रूप में दायित्व विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसमें प्रोफेसर नीलमणि प्रसाद वर्मा, प्रोफेसर अवनीश कुमार, डॉ. के.एल. सरकार (कार्यकारी निदेशक एडसिल, नोएडा), डॉ. संजय कुमार सिंह (संयुक्त निदेशक एन.आई.ओ.एस., नोएडा), प्रेम कुमार चोपड़ा (कुलसचिव आई.आई.टी., गुजरात), बी.एन. चौधरी (कुलसचिव आई.आई.टी., मेघालय) एवं प्रोफेसर जगदेव कुमार शर्मा (लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ, दिल्ली) ने सहभागिता की। परिचर्चा सत्र की अध्यक्षता सुनीति शर्मा, निदेशक (राजभाषा) द्वारा की गई।
सत्रों की कार्यवाही का संचालन श्री अनुपम श्रीवास्तव ने किया। केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के प्रोफेसर हरिशंकर ने संगोष्ठी की कार्यवाही का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
निदेशक (राजभाषा) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ।

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सांध्यकालीन पाठ्यक्रम (सत्र 2020-21) की प्रवेश सूचना । विज्ञापन - आगरा । विज्ञापन - दिल्ली ।  आवेदन तिथि बढ़ाए जाने संबंधी विज्ञापन (नया) 

शिक्षक दिवस (दि.: 05.09.2020) के अवसर पर केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा आयोजित 'शिक्षकों से संवाद' कार्यक्रम - 'हिंदी शिक्षकों के समक्ष चुनौतियाँ'

दिनांक 18.08.2020 (पू.) से प्रो. बीना शर्मा ने निदेशक, केंद्रीय हिंदी संस्थान का अतिरिक्त कार्य-दायित्व प्राप्त किया।

दि. 17.08.2020 (अप.) को प्रो. नन्दकिशोर पाण्डेय संस्थान के निदेशक पद से सेवा अवधि पूरी कर अपने मूल संस्था के लिए कार्य-मुक्त हुए।

भारत की नई शिक्षा नीति पर केंद्रित शैक्षिक उन्मेष पत्रिका के आगामी विशेषांक खंडों (ई-पत्रिका) के लिए आलेख आमंत्रण (पत्र डाउनलोड करें) (नया)

के.हिं.शि. मंडल के उपाध्यक्ष महोदय द्वारा माननीय अध्यक्ष जी का अभिनंदन एवं शैक्षणिक-साहित्यिक संवाद

कें.हिं.शि. मंडल के नवनियुक्त उपाध्यक्ष महोदय द्वारा संस्थान मुख्यालय का संदर्शन (दि. 10 जुलाई 2020)

संस्थान द्वारा आयोजित की जाने वाली नियमित पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा सहित सभी परीक्षाएँ आगामी आदेश तक के लिए स्थगित कर दी गई हैं। कार्यालय सूचना देखें (नया)

श्री अनिल कुमार शर्मा  केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के नये उपाध्यक्ष नामित किए गए। (नया)

हिंदी सेवी सम्मान योजना - वर्ष 2017 के पुरस्कारों की घोषणाप्रेस विज्ञप्तिवीडियो प्रेस वार्ता । 

संस्थान मुख्यालय में माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री जी का आगमन, दि. 24.2.2020, रविवार  (फोटो अलबम) (मीडिया रिपोर्ट)

लघु पत्रिकाओं के लिए वित्तीय सहयोग योजना हेतु आवेदन एवं नियम निर्देशिका । सहायता : NGO दर्पण वेब पोर्टल पर यूनिक आई डी बनाने के लिए दिशा निर्देश  

साहित्य अकादमी और केंद्रीय हिंदी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में डॉ. नगेंद्र जन्म- 

       शतवार्षिकी समारोहएवं लेखक से भेंट कार्यक्रम
परिचय
  • केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के उच्चतर विभाग द्वारा 1960 ई. में स्थापित स्वायत्त संगठन केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल द्वारा संचालित शिक्षण संस्था है। संस्थान मुख्यतः हिंदी के अखिल भारतीय शिक्षण-प्रशिक्षण, अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार के लिए कार्य-योजनाओं का संचालन करता है।
  • संस्थान का मुख्यालय आगरा में स्थित है। इसके आठ केंद्र - दिल्ली (स्था. 1970), हैदराबाद (स्था. 1976), गुवाहाटी (स्था. 1978), शिलांग (स्था. 1987), मैसूर (स्था. 1988), दीमापुर (स्था. 2003), भुवनेश्‍वर (स्था. 2003) तथा अहमदाबाद (स्था. 2006) में सक्रिय हैं।

और..

विकास यात्रा

केंद्रीय हिंदी संस्थान की स्थापना सन् 1960 में हुई थी। तब से आज तक लगातार मंडल द्वारा निर्धारित लक्ष्यों एवं उद्देश्यों के अनुपालन में संस्थान हिंदी के शैक्षणिक विकास, बहुआयामी अनुसंधान और प्रचार-प्रसार के लिए अपनी गतिविधियों को विस्तार देता रहा है। पाँच दशकों से अधिक लंबी इस विकास-यात्रा के उल्लेखनीय पड़ावों की जानकारी इस खंड में बिंदुवार प्रस्तुत की जा रही है।

...और

विज़न 2021
  • आधुनिकतम संचार माध्यमों और सूचना प्रौद्योगिकी का हिंदी भाषा शिक्षण और दूर शिक्षा के लिए अधिकाधिक प्रयोग
  • यूनिकोड का व्यापक प्रचार और प्रसार
  • एक विशाल पोर्टल और बहुभाषी वेबसाइट
  • पॉप्युलर कल्चर के महत्त्व का रेखांकन, फ़िल्म लोक-नाट्य, कविसम्मेलन और मुशायरे
  • हिंदी की बोलियों का संरक्षण हो तथा देश-विदेश में नए केंद्रों की स्थापना
  • देश-विदेश के हिंदी के प्रख्यात साहित्य शिल्पियों के व्यक्तित्व और कृतित्व पर फ़िल्में बनाई जाएं
  • विश्व भर की संस्थाओं और विश्वविद्यालयों से सकर्मक जुड़ाव
  • मानकीकृत पाठ्यक्रमों का निर्माण एवं संचालन
  • विश्व के महान साहित्यिक कृतियों और ज्ञान-विज्ञान के ग्रंथों का हिंदी अनुवाद
  • जिन संस्थाओं के पास साधनों का अभाव है, हिंदी के विकास के लिए उनकी मदद

और..

फ़ोटो गैलरी

संस्थान की विविध गतिविधियों से संबंधित छवियों का विस्तृत संग्रह

और...

ओडियो-विजुअल गैलरी

स्वर्ण जयंती वीडियो

केंद्रीय हिंदी संस्थान की स्वर्ण जयंती

उपयोगी लिंक

हिंदी शिक्षण, हिंदी भाषा संसाधन और संवर्धन से जुड़ी उपयोगी सूचना एवं जानकारियों से जुड़ी वेबसाइटों और वेब-पोर्टलों के लिंक।

और...

ऑनलाइन पत्रिकाएँ

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संस्थान समाचार - संस्थान मुख्यालय एवं इसके क्षेत्रीय केंद्रों का त्रैमासिक समाचार बुलेटिन