शनिवार, दिस 07

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गिरीश कर्नाड

गिरीश कर्नाड बहुचर्चित रचनात्मक लेखकों एवं कलाकारों में से एक हैं। वे कन्नड़ भाषा के सशक्त सृजनधर्मी, नाटककार, सशक्त अभिनेता और फ़िल्म निर्देशक हैं। लेखक, पत्रकार, अभिनेता और निर्देशक, इन सभी भूमिकाओं को आपने बख़ूबी एक साथ निभाया है। कन्नड़ साहित्य के सृजनात्मक लेखन के लिए उन्हें भारत के सर्वाधिक प्रतिष्ठित 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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जीवन परिचय

19 मई, 1938 ई. को महाराष्ट्र के माथेरान में गिरीश कर्नाड का जन्म हुआ था। बाल्यावस्था से ही उनका लगाव नाटकों की ओर था। अपने स्कूली समय से ही कर्नाड ने थियेटर से जुड़कर कार्य करना आरम्भ कर दिया था। अपनी स्नातक पूरी करने के बाद वे इंग्लैण्ड चले गए और वहीं पर आगे की शिक्षा पूर्ण की। भारत वापस लौटने पर गिरीश कर्नाड ने मद्रास में सात साल तक ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में कार्य किया, लेकिन कुछ ही समय बाद यह कार्य छोड़ दिया। बाद में शिकागो गए और एक प्रोफ़ेसर के रूप में काम किया। इसके बाद पुन: भारत लौटने पर इन्होंने अपने साहित्य के ज्ञान से क्षेत्रीय भाषाओं में कई फ़िल्मों का निर्माण किया और पटकथा कार्य भी करने लगे।

प्रतिभा सम्पन्न

लगभग चार दशकों से गिरीश कर्नाड नाटक के क्षेत्र में रचनात्मक रूप से सक्रिय हैं। उनके नाटकों को इब्राहिम अलकाजी, ब.ब. कारंत, आलोक पद्मसी, अरविंद गौड़, सत्यदेव दुबे, विजय मेहता, श्यामानंद जालान और अमल अल्लाना जैसे थिएटर और रंगमंच के लब्धप्रति‍ष्ठ निर्देशकों ने निर्देशित किया है। गिरीश कर्नाड ने अभिनेता, निर्देशक और स्क्रीन लेखक के रूप में भारतीय सिनेमा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सृजनात्मक प्रतिष्ठा प्रदान की है।

सिनेमा में योगदान

गिरीश कर्नाड केवल एक सफल पटकथा लेखक ही नहीं, बल्कि एक बेहतरीन फ़िल्म निर्देशक भी हैं। उन्होंने वर्ष 1970 में कन्नड़ फ़िल्म 'संस्कार' से अपने सिने कैरियर को प्रारम्भ किया था। इस फ़िल्म की पटकथा उन्होंने स्वयं ही लिखी थी। इस फ़िल्म को कई पुरस्कार प्राप्त हुए थे। इसके पश्चात श्री कर्नाड ने और भी कई फ़िल्में कीं। उन्होंने कई हिन्दी फ़िल्मों में भी काम किया था। इन फ़िल्मों में 'निशांत', 'मंथन' और 'पुकार' आदि उनकी कुछ प्रमुख फ़िल्में हैं। गिरीश कर्नाड ने छोटे परदे पर भी अनेक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम और 'सुराजनामा' आदि सीरियल पेश किए हैं। उनके कुछ नाटक, जिनमें 'तुग़लक' आदि आते हैं, सामान्य नाटकों से कई मामलों में पूरी तरह से भिन्न हैं। गिरीश कर्नाड 'संगीत नाटक अकादमी' के अध्यक्ष पद को भी सुशोभित कर चुके हैं।

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पुरस्कार व सम्मान

अभिनेयता और भारतीय रंगमंच को श्री कर्नाड ने नई ऊँचाईयाँ प्रदान की हैं। भारत सरकार द्वारा उनकी सृजनशीलता के लिए उन्हें 'पद्मश्री' और 'पद्मभूषण' से भी अलंकृत किया गया है। गिरीश कर्नाड को 'गंगाशरण सिंह पुरस्कार' से सम्मानित करके केंद्रीय हिंदी संस्थान गौरवान्वित है।