रविवार, सित 22

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सुभाष लखेड़ा

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सुभाष लखेड़ा का जन्म अक्टूबर, 1949 ई. में हुआ था। इन्होंने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन से संबंधित रक्षा शरीर क्रिया एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (डिपास) में अड़तीस वर्षों तक सेवा की है। यहाँ से अवकाश प्राप्त करने के बाद वरिष्ठ वैज्ञानिक सुभाष लखेड़ा ने लोकप्रिय विज्ञान लेखन के साथ-साथ वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में गंभीर कार्य किया है। वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यों से जुड़े हुए आपके 30 से अधिक शोधपत्र, रिपोर्टें और शोध सारांश प्रकाशित हुए हैं।

रचना कार्य

विगत तीन दशकों से लगातार लोकप्रिय विज्ञान लेखन और राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार में संलग्न रहते हुए श्री लखेड़ा की एक हज़ार दो सौ से भी अधिक रचनाएँ प्रकाशित हैं। आपने पंद्रह विज्ञान कथाओं के अलावा विभिन्न विषयों पर केंद्रित एक सौ बाईस विज्ञान वार्ताओं की रचना की है, जिनका आकाशवाणी के दिल्ली केंद्र और राष्ट्रीय प्रसारण सेवा के अंतर्गत प्रसारण हो चुका है। इसके अलावा श्री लखेड़ा की खेल एवं रक्षा शरीर क्रिया विज्ञान पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण पुस्तक 'खेल खिलाड़ी और विज्ञान' भी प्रकाशित हुई है, जो खेल विज्ञान के क्षेत्र में हिंदी की पहली पुस्तक है। आप केंद्रीय सचिवालय हिंदी परिषद द्वारा प्रकाशित पत्रिका 'विज्ञान गंगा' और डिपास की गृहपत्रिका 'स्पंदन' के संपादक रह चुके हैं।

हिंदी का प्रचार

देश के विभिन्न नगरों में राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार में श्री सुभाष लखेड़ा की सक्रिय भागीदारी रही है। आप केंद्रीय सचिवालय हिंदी परिषद, नई दिल्ली; विज्ञान परिषद, प्रयाग और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, मुंबई के आजीवन सदस्य हैं और इन संस्थाओं में हो रहे वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रचार-प्रसार संबंधी कार्यों में आपकी अद्यतन सक्रिय भूमिका है।

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पुरस्कार

हिंदी में वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधानपरक साहित्य लेखन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान को समर्पित भाव से सेवारत और अनेकानेक पुरस्कारों और सम्मानों से अलंकृत सुभाष लखेड़ा को 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' की ओर से 'आत्माराम पुरस्कार' प्रदान किया गया है।