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हिंदी लोक शब्दकोश परियोजना

हिंदी लोक शब्दकोश परियोजना

परिचयः

हिंदी की सांस्कृतिक और भाषायी विरासत को संजोने और समेटने का उद्देश्य के साथ परिकल्पित 'हिंदी लोक शब्दकोश परियोजना' के माध्यम से हिंदी की 48 बोलियों/ उपभाषाओं/ भाषाओं (1991 की जनगणना की 1997 में प्रकाशित भाषावैज्ञानिक मानचित्रावली (लिंग्विस्टिक एटलस) के आधार पर) डिजिटल त्रिभाषी शब्दकोशों का 48 खंडों में निर्माण की योजना है। यह हिंदी की लोक शब्द संपदा के संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़ी यह महत्वपूर्ण परियोजना केंद्रीय हिंदी संस्थान के  अनुसंधान एवं भाषा विभाग द्वारा संचालित है। 

परियोजना के अंतर्गत शब्दकोशों के निर्माण का मुख्य उद्देश्य हिंदी की सभी बोलियों / उपभाषाओं / भाषाओं के अनगिनत शब्दों का संरक्षण है। ये सभी शब्दकोश मुद्रित रूप में प्रकाशित करने के साथ-साथ डिजिटल/ ऑनलाइन रूप में भी उपलब्ध कराने की योजना है जिसमें न केवल एक विशाल शब्द भण्डार का संरक्षण होगा, बल्कि हिंदी की सांस्कृतिक जड़ें भी संपुष्ट होंगी और देश-विदेश के हिंदी के अध्येताओं और अनुसंधाताओं के साथ-साथ हिंदी प्रेमी लाभान्वित होंगे।

आज के दौर में हिंदी की अनेकों लोकभाषाएँ विलुप्त सी होती जा रही हैं साथ ही इनके अद्‍भुत नाद और अर्थ सौंदर्य वाले शब्द भी खो रहे हैं, यदि आगामी 10-15 वर्षों में इनकी सुधि नहीं ली गई तो हम इन्हें पूर्णतः खो देंगे, इसीलिए हिंदी की इस महत्वाकांक्षी बृहद् परियोजना से ऐसी आशा है कि हिंदी लोक शब्दकोश परियोजना कोशनिर्माण एवं भाषा प्रलेखन के संदर्भ में मील का पत्थर साबित होगी। 

कार्य-योजना एवं क्रियान्वयन-प्रविधि

48 खंडों में बनने वाले हिंदी की 48 बोलियों/ उपभाषाओं/ भाषाओं के शब्दकोशों के निर्माण की कार्य-योजना एवं क्रियान्वयन-प्रविधि का विवरण निम्नलिखित हैः 

1.            परियोजना के शब्दकोशों में केवल उन शब्दों का समावेश होगा जिनकी मानक हिंदी के शब्दों से ज्यादा ध्वन्यात्मक साम्य न हो।                 तदैव इन शब्दकोशों में एक विशाल एवं समृद्ध शब्दावली का संग्रहण होगा।

2.            शब्दावली संकलन के लिए प्रथमतः विभिन्न बोली/ उपभाषा/ भाषा क्षेत्रों में संस्थान के कोशकर्मियों द्वारा क्षेत्र-कार्य किया जायेगा। शब्द संकलन हेतु साक्षात्कारों की रिकार्डिंग के लिए डिजिटल डाटा रिकार्डरों का उपयोग किया जायेगा।

3.            शब्दकोशों की प्रविष्टियों का प्रारूप निम्नवत प्रस्तावित हैः-

शब्द (देवनागरी में) (अंतर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक लिपि में) (व्याकरणिक कोटि) (हिंदी में अर्थ/व्याख्या) (प्रयोग बोली/उपभाषा) (हिंदी में अनुवाद) (पर्याय यदि कोई हो) (बोली का भौगोलिक क्षेत्र) (अर्थ/शब्दवर्ग)

4.            विभिन्न बोलियों के शब्दकोशों, साहित्यिक पुस्तकों, पत्रिकाओं आदि का संकलन कर उनसे शब्दावली का संग्रहण।

5.            संकलित शब्दावली का संपादकीय मंडल द्वारा चयन एवं संपादन। तदुपरांत प्रकाशन एवं इंटरनेट पर पदार्पण।

हिंदी लोक शब्दकोश-निर्माण परियोजनांतर्गत चयनित हिंदी की 48 बोलियाँ/ उपभाषाएँ/ भाषाएँ (1997 में प्रकाशित 1991 की जनगणना की भाषावैज्ञानिक मानचित्रावली के आधार पर) - 

1. अवधी

2. बघेली

3. बागड़ी (राजस्थानी)

4. बंजारी

5. मेवाड़ी

6. मेवानी

7. बाड़मौड़ी/गद्दी

8. भोजपुरी

9. ब्रजभाषा

10. बुन्देली

11. नागपुरिया

12. निमाड़ी

13. चम्बेली

14. छत्तीसगढ़ी

15. छुडा़ही

16. ढूंढाड़ी

17.पहाड़ी

18. पंचपरगनिया

19. गढ़वाली

20. हाड़ौती

21. हरियाणी

22. हिंदी

23. पंगवाली

24. पवारी

25. जौनसारी

26. कांगड़ी

27 खैरारी

28. खोरठा /खोट्टा

29.राजस्थानी

30. सदान/सादरी

31. कुलवी

32. कुमायूँनी

33. कुर्माली ठार

34. लबानी

35. सानोरी

36. सिरमौरी

37. लमानी/लबांड़ी

38. लड़िया

39. लोधी

40. मगही

41. सोड़वारी

42. सुगाली

43. मैथिली

44. मालवी

45. मांडली

46.मारवाड़ी

47. सरगुजिया

48. सूरजपुरी

 

कार्य के प्रकार

 

परियोजना के अंतर्गत प्रत्येक शब्दकोश का निर्माण आधुनिक कोशवैज्ञानिक तकनीक एवं चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। शब्दावली संकलन के लिए प्रथमतः विभिन्न लोकभाषा क्षेत्रों (उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि) में परियोजना के कोशकर्मियों द्वारा क्षेत्र कार्य किया जाएगा। शब्द संकलन हेतु साक्षात्कारों की रिकार्डिंग के लिए डिजिटल ऑडियो-वीडियो रिकार्डरों का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा लोकभाषाओं के उपलब्ध लिखित एवं प्रकाशित साहित्य, शब्दकोशों, पांडुलिपियों, पत्र-पत्रिकाओं आदि का भी संकलन कर उनसे शब्दावली का संग्रहण किया जाएगा। शब्दकोशों का निर्माण कोशविज्ञान के अद्युनतन तकनीकी के द्वारा किया जाएगा। इस कार्य को नवीनतम प्रौद्योगिकी व चरणबद्ध पद्धति से किया जा रहा है, जिसके मुख्यतः चार चरण हैं।

 

1.   आर्थी क्षेत्रों पर आधारित प्रश्‍नावली की सहायता से क्षेत्र कार्य व प्रकाशित स्रोतों द्वारा शब्दावली संकलन।

 

2.   संकलित डेटा (परियोजना द्वारा निर्मित एंट्री फॉर्मों पर लिखित) का अत्याधुनिक कोशवैज्ञानिक सॉफ्टवेयर की सहायता से यूनीकोड रूप में कंप्यूटर संयोजन।

 

3.   लोकभाषा संपादक और प्रधान संपादक द्वारा कंप्यूटर पर तैयार शब्दकोश का भाषा संपादन, शब्दावली संवर्धन व आवश्यक संशोधन के पश्‍चात परियोजना एकक द्वारा शब्दकोश की हिंदी प्रविष्‍टियों का अंग्रेजी अनुवाद।

 

4.   कंप्यूटर पर शब्दकोश के संपादन व संशोधन के उपरांत पुस्तकाकार रूप में तथा इंटरनेट पर प्रकाशन। 

 

परियोजना के अंंतर्गत किए गये कार्यों का विवरण

 

1.   परियोजना के प्रथम चरण में भोजपुरी-हिंदी-इंग्लिश लोक शब्दकोश का प्रथम संस्करण प्रकाशित – वर्ष-2009। द्वितीय संस्करण के लिए पुनः हस्तलिखित परिशिष्‍ट व प्रविष्‍टियों का लेखनकार्य व संशोधन का कार्य पूर्ण किया गया।

 

2.   ब्रज-हिंदी-इंग्लिश लोक शब्दकोश में कुल 10000 प्रविष्‍टियों में से संपादन के पश्‍चात कुल 8,301 प्रविष्‍टियाँ ली गई हैं और यह प्रकाशन के लिए लगभग पूर्ण हो चुका है। साथ ही अंग्रेजी अनुवाद का कार्य जारी है।

 

3.   राजस्थानी-हिंदी-इंग्लिश लोक शब्दकोश में कुल 9,500 प्रविष्‍टियों में से संपादन के पश्‍चात कुल 8,387 प्रविष्‍टियाँ ली गई हैं और प्रकाशन के लिए लगभग पूर्ण हो चुका है और अंग्रेजी अनुवाद का कार्य जारी है।

 

4.   अवधी-हिंदी-इंग्लिश लोक शब्दकोश में कुल 10,297 शब्दों की प्रविष्‍टि हेतु संकलन व अत्याधुनिक कोश वैज्ञानिक सॉफ्टवेयर द्वारा कंप्यूटर पर टंकण का कार्य संपन्न।

 

5.   बुंदेली-हिंदी-इंग्लिश लोक शब्दकोश के लिए 9,335 शब्दों का प्रविष्‍टि हेतु संकलन व अत्याधुनिक कोश वैज्ञानिक सॉफ्टवेयर द्वारा कंप्यूटर पर टंकण का कार्य संपन्न।

 

6.   हरियाणवी-हिंदी-इंग्लिश लोक शब्दकोश के लिए प्रकाशित साहित्य व सामग्री का परियोजना हेतु संकलन किया गया तथा 4,500 प्रविष्‍टियों का लेखन कार्य किया जा चुका है।

 

7.   गढ़वाली-हिंदी-इंग्लिश लोक शब्दकोश के लिए प्रकाशित साहित्य व सामग्री का परियोजना हेतु संकलन किया गया तथा 500 प्रविष्‍टियों का लेखन कार्य किया गया।

 

8.   अवधी, बुंदेली, हरियाणवी, गढ़वाली, लोकभाषाओं के भाषा संपादकों के चयन हेतु विचाराधीन व हरियाणवी के भाषाई प्रविष्टियों के आकलन एवं निर्धारण तथा भाषा संपादक के चयन हेतु कार्यशाला का आयोजन किया जाना है। साथ-ही-साथ मगही, मालवी, कांगड़ी लोकभाषाओं के शब्दकोश निर्माण के लिए साहित्यिक सामग्री का संकलन कार्य किया जा चुका है।