मंगलवार, सित 24

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प्रसार कार्यक्रम दिल्ली केंद्र

केंद्र के नियमित कार्यक्रमों के अतिरिक्त दिल्ली केंद्र अन्य कई महत्वपूर्ण कार्यों का आयोजन करता रहा है।

  1. शैक्षिक कार्यक्रमों के अंतर्गत केंद्र में निम्नलिखित कार्य उल्लेखनीय है-
  2. (i) वर्ष 1972-73 से विदेशों से आने वाले प्रतिभागियों के लिए पाँच ग्रीष्माकलीन पाठ्यक्रम चलाए गए, जिनमें 134 प्रतिभागी प्रशिक्षित हुए।

    (ii) 1971-72 में दिल्ली के हिन्दी अध्यापकों के लिए एक विशेष पाठ्यक्रम आयोजित किया, जिसमें 19 प्रतिभागी प्रशिक्षित हुए।

    (iii) 1974-75 में 'भारतीय अध्ययन के अमेरिकी संस्थान' के सौजन्य से केंद्र ने अमेरिका के हिंदी छात्रों का विशेष पाठ्यक्रम आयोजित किया, जिसमें 22 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

    (iv) सत्तर के दशक में दिल्ली केंद्र द्वारा बैंक के अधिकारियों के लिए 'बैंकिंग हिंदी' पर दो प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 50 प्रतिभागी प्रशिक्षित हुए।

  3. वर्ष 1983 में दिल्ली में दिल्ली में आयोजित तृतीय विश्व हिंदी सम्मेलन के आयोजन का दायित्व केंद्रीय हिंदी निदेशालय तथा संस्थान के दिल्ली केंद्र ने सयुक्त रूप से वहन किया।
  4. 1989 में केंद्रीय हिंदी संस्थान की रजत जयंती समारोह के आयोजन के लिए जो समिति बनाई गई थी, उसके सदस्य सचिव प्रो. मा. गो. चतुर्वेदी, क्षेत्रीय निदेशक, दिल्ली केंद्र ने 1989-90 में अनेक शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित किए। संस्थान के सभी कंद्रों में राष्ट्रीय विचार गोष्टियॉ आयोजित की गई। हैदराबाद केंद्र में अंतर्राष्ट्रीय हिंन्दी कवि सम्मेलन तथा दिल्ली केंद्र में अंतर्राष्ट्रीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
  5. संस्थान के ' रजत जयंती समारोह ' का उद्घाटन भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी द्वारा विज्ञान भवन के सभागर में किया गया था तथा उन्ही के कर कमलों से 25 हिंदी सेवी विद्वानों को पुरस्कृत किया गया था। रजत जयंती समारोज समिति की अनुशंसा के अनुसार प्रतिवर्ष अब 15 हिंदी विद्वानों को भारत के राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति भवन में पुरस्कृत किया जाता है। इस आयोजन का कार्य संचालन दिल्ली केंद्र देखता है जो इसे पिछले 21 वर्षों से बखूबी निभा रहा है।
  6. ' रजत जयंती समारोह ' के संदर्भ में वर्ष 1990 में दिल्ली केंद्र ने अंतर्राष्ट्रीय हिंदी संगोष्ठी का आयोजन किया, जिसका उद्घाटन तत्कालीन श्रम-कल्याण मंत्री श्री राम विलास पासवान ने किया था। तीनों दिनों के इस कार्यक्रम में देश-विदेश के अनेक देशी-विदेशी विद्वानों ने भाग लिया। तत्कालीन राष्ट्रपति महामहिम ज्ञानी जैल सिंह ने संगोष्ठी के समापन के अवसर पर उद्बोधन भाषण दिया।
  7. संस्थान की सेवा में 25 वर्ष कार्य करने वाले सभी कार्मिकों रजत जयंती वर्ष समारोह में सम्मानित किया गया।