मंगलवार, सित 24

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शैक्षिक एवं प्रशासनिक वर्ग गुवाहाटी केंद्र

शैक्षिक सदस्य

  • डॉ. राजवीर सिंह (प्रोफेसर एवं क्षेत्रीय निदेशक)

प्रशासनिक सदस्य

  • श्री रंजीत कुमार (कनिष्ठ आशुलिपिक)
  • श्री विनोद वासफोर (लघु श्रेणी लिपिक)
  • श्री उमाकांत भट्टरोई (लघु श्रेणी लिपिक (तदर्थ))
  • श्री अच्युतचंद्र कलिता (चपरासी)
  • श्री गौतम दास (चपरासी)
  • श्री सुरेंद्र कुमार सिन्हा (चौकीदार)
  • श्री जगत दास (चौकीदार)
  • श्री प्रदीप छेत्री   (वाहन चालक)

पाठ्यक्रम गुवाहाटी केंद्र

 शिक्षण-प्रशिक्षण

  • नवीकरण पाठ्यक्रम (लघु अवधीय)
  • स्नातकोत्तर अनुवाद सिद्धांत एवं व्यवहार डिप्लोमा (अंशकालिक)
  • सुश्री जानकी जेठवानी द्वारा दिनांक 14.7.2005 से 25.7.2005 तक अंग्रेज़ी भाषा विकास विभाग में सिक्किम राज्य की कक्षा 5 से 8 तक की हिंदी पुस्तकों के परिवर्धन का कार्य किया गया।
  • दिनांक 10.9.2005 को केन्द्र में अनुवाद सिध्दांत और व्यवहार डिप्लोमा परीक्षा का शुभारंभ किया गया।
  • दिनांक 19.9.2005 से केन्द्र पर आंध्र प्रदेश से आए प्रवीण कक्षा में प्रवेश पाने वाले 19 विद्यार्थियों के लिए सत्रारंभ किया गया।

नवीकरण पाठयक्रम

  • केंद्रीय हिंदी संस्थान, क्षेत्रीय केन्द्र शिलांग द्वारा मेघालय राज्य के रिभोई ज़िले के अध्यापकों के लिए नवीकरण पाठयक्रय का आयोजन दिनांक 23.8.2005 से 9.9.2005 रिभोई ज़िले के मुख्यालय, नाड.पोड में आयोजित किया गया। इस पाठयक्रम में कुल 45 अध्यापकों को बुलाया गया था, जिसमें से कुल 38 अध्यापकों ने भाग लिया।
  • दिनांक 5.9.2005 को प्रतिभागियों ने अध्यापक दिवस कार्यक्रम धूमधान से मनाया।
  • दिनांक 13.9.2005 को शिलांग केन्द्र द्वारा मिज़ोरम राज्य के आइज़ोल अध्यापकों के लिए 71 वाँ नवीकरण पाठयक्रम मिज़ोरम हिंदी प्रचार सभा के हॉल में किया गया। इस पाठयक्रम में 36 प्रतिभागी सम्मिलित हुए।
  • दिनांक 1.9.2005 से 3.9.2005 तक संसदीय राजभाषा समिति के द्वारा शिलांग केन्द्र स्थित केंद्रीय कार्यालयों का निरीक्षण किया गया, जिसमें केंद्रीय हिंदी संस्थान, शिलांग केन्द्र भी सदस्य के रूप में नामित है।

वर्ष 2006-07 में हुए नवीकरण पाठयक्रमों का विवरण

पाठयक्रम विवरण स्थान अवधि प्रतिभागियों की संख्या
नवीकरण नलवाड़ी 24.07.06 से 11.08.06 40
नवीकरण डिब्रूगढ़ 11.06.06 से 28.09.06 33
नवीकरण ईटानगर 30.10.06 से 17.11.06 34
नवीकरण मंगलदै 04.01.07 से 22.01.07 50
नवीकरण कामरूप 13.03.07 से 31.03.07 18

वर्ष 2007-08 में हुए नवीकरण पाठयक्रमों का विवरण

पाठयक्रम विवरण स्थान अवधि प्रतिभागियों की संख्या
नवीकरण नगांव 28.05.07 से 16.06.07 44

हैदराबाद केंद्र

हैदराबाद केंद्र की स्थापना वर्ष 1976 में हुई। शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत यह केंद्र स्कूलों/कॉलेजों एवं स्वैच्छिक हिंदी संस्थाओं के हिंदी अध्यापकों के लिए 1 से 4 सप्ताह के लघु अवधीय नवीकरण कार्यक्रमों का आयोजन करता है, जिसमें हिंदी अध्यापकों को हिंदी के वर्तमान परिवेश के अंतर्गत भाषाशिक्षण की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान कराया जाता है। वर्तमान में हैदराबाद केंद्र का कार्यक्षेत्र आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गोवा, महाराष्ट्र एवं केंद्र शासित प्रदेश पांडिचेरी एवं अण्डमान निकोबार द्वीप समूह हैं। हैदराबाद केंद्र पर हिंदी शिक्षण पारंगत पाठ्यक्रम भी संचालित किया जाता है।

स्थापना

1976 में दक्षिण भारत के प्रथम केंद्र के रूप में हैदराबाद केंद्र की स्थापना हुई थी। उस समय इसका कार्यक्षेत्र दक्षिण के चारों राज्यों अर्थात् आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु कर्नाटक और केरल के साथ-साथ गुजरात, महाराष्ट्र गोवा, दमन तथा दीव, पांडिचेरी, अंदमान निकोबार तथा लक्ष्यद्वीप था, दायित्व मैसूर केंद्र को सौंप दिया गया। गुजरात, दमन तथा दीव के कार्यक्रम पहले मुख्यालय के द्वारा तथा अब अहमदाबाद केंद्र के द्वारा संचालित हो रहे हैं। इस प्रकार वर्तमान में हैदराबाद केंद्र के कार्यक्षेत्र कें अतंर्गत आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र गोवा, पांडिचेरी तथा अंड़मान निकोबार आते हैं। हैदराबाद केंद्र में प्राथमिक मिडिल, माध्यमिक और महाविद्यालयों (स्नातकोत्तर) के हिंदी अध्यापकों के लिए लघु अवधि के नवीकरण पाठ्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। केंद्र के कार्यक्षेत्र में आने वाले राज्यों में और केंद्र सरकार की स्वैच्छिक संस्थाओं नवोदय विद्यालयों केंद्रीय विद्यालयों और आश्रम पाठ्शालाओं चिन्मय विद्यालय तथा हैदराबाद हिंदी प्रचार सभा, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा आदि स्वैच्छिक संस्थाओं के प्राथमिक से लेकर उच्च स्तर तक के हिंदी शिक्षकों के लिए नवीकरण पाठ्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। साथ ही इस केंद्र द्वारा प्रयोजनमूलक पाठ्यक्रम जैसे रेलवे विभाग, डाक विभाग, वित्त विभाग आदि केंद्र सरकार की संस्थाओं के कर्मचारियों के लिए पाठ्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहा है।

उद्देश्य

राज्य में सेवारत हिंदी शिक्षकों के लिए लघुअवधीय नवीकरण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन नवीकरण कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों को भाषाशिक्षण की नवीन प्रविधियों से परिचित कराया जाता है तथा उन्हें मानक हिंदी के प्रयोग के प्रति सतत जागरूकता रखने का प्रयास किया जाता है।

अब तक पूर्णकालिक क्षेत्रीय निदेशक

1. डॉ. वी. रा. जगन्नाथन प्रोफेसर 01.07.1976 से 1.05.1981
2. डॉ. सीताराम शास्त्री रीडर 02.05.1981 से 08.08.1983
3. डॉ. वी. रा. जगन्नाथन प्रोफेसर 09.08.1983 से 30.09.1987
4. डॉ. कृष्ण कुमार शर्मा प्रोफेसर 09.03.1988 से 30.08.1991
5. डॉ. मा. गोविन्द चतुर्वेदी प्रोफेसर 05.09.1991 से 30.06.1994
6. डॉ. पी. विजयराघव रेड्डी रीडर 01.07.1994 से 30.06.1998
7. प्रो. धर्मपाल गांधी प्रोफेसर 01.07.1998 से 31.07.2001
8. प्रो. टी. के. नारायण पिल्लै प्रोफेसर

16.07.2001 से 31.07.2010

9. प्रो. वाई शाकुंतलम्मा प्रोफेसर 01.08.2010 से अब तक

कार्यक्षेत्र

आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गोवा, महाराष्ट्र राज्य के साथ-ही-साथ केंद्रशासित प्रदेश पांडिचेरी तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह।

संपर्क स्थल

2-2-12/5, दुर्गाबाई देशमुख मार्ग,
हैदराबाद-500007 (आंध्र प्रदेश)
दूरभाष: 040-27427208 27426101
फैक्स: 040-27427208

संबद्ध प्रशिक्षण महाविद्यालय

हिंदी शिक्षक-प्रशिक्षण के स्तर को समुन्नत करने और राष्ट्रीय स्तर पर उसमें एकरूपता लाने के प्रयास में भारत सरकार के निर्देश पर देश के कई राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में अपने-अपने क्षेत्रों में हिंदी शिक्षण-प्रशिक्षण महाविद्यालयों, संस्थाओं को स्थापित किया गया है और उन्हें संस्थान से संबद्ध किया है। इन संबद्ध महाविद्यालयों/संस्थाओं में प्रांतीय आवश्यकताओं के अनुरूप संस्थान के पाठ्यक्रम संचालित एवं आयोजित किए जाते हैं और संस्थान ही इन पाठ्यक्रमों की परीक्षाएँ नियंत्रित करता है। कुछ प्रमुख महाविद्यालयों/संस्थाओं के नाम इस प्रकार हैं-

  • राजकीय हिंदी शिक्षण-प्रशिक्षण महाविद्यालय, उत्तर गुवाहाटी (असम)
  • मिज़ोरम हिंदी शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थान, आईज़ोल (मिज़ोरम)
  • राजकीय हिंदी शिक्षण-प्रशिक्षण महाविद्यालय, मैसूर (कर्नाटक)
  • राजकीय हिंदी शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थान, दीमापुर (नागालैंड)

संस्थान हिंदी अध्ययन-अध्यापन और अनुसंधान का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। संस्थान को उच्च स्तरीय शैक्षिक संस्थान के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, अपितु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता प्राप्त है। हिंदी भारत की सामासिक संस्कृति की संवाहिका के रूप में अपनी सार्थक भूमिका निभा सके, इस उद्देश्य एवं संकल्प के साथ संस्थान निरंतर कार्यरत है। अखिल भारतीय स्तर पर हिंदी को संपर्क भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने के लिए भी संस्थान अथक प्रयास कर रहा है। संस्थान का मूलभूत उद्देश्य है कि भारतीय भाषाएँ एक दूसरे के निकट आएँ और सामान्य बोधगम्यता की दृष्टि से हिंदी इनके बीच सेतु का कार्य करे तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय चेतना, संस्कृति एवं उससे संबद्ध मूल तत्व हिंदी के माध्यम से प्रसारित ही न हों, बल्कि सुग्राह्य भी बनें।

शिलांग केंद्र

केंद्रीय हिंदी संस्थान, शिलांग की स्थापना 1976 में हुई थी। 1978 में यह केंद्र गुवाहाटी स्थानांतरित कर दिया गया। पुन: इसकी स्थापना वर्ष 1987 में की गई। हिंदी के प्रचार-प्रसार के अंतर्गत शिलांग केंद्र हिंदी शिक्षकों के लिए नवीकरण (तीन सप्ताह का) पाठ्यक्रम और असम रायफ़ल्स के विद्यालयों के हिंदी शिक्षकों, केंद्र सरकार के कर्मचारियों एवं अधिकारियों को हिंदी का कार्य साधक ज्ञान कराने के लिए 2-3 सप्ताह का हिंदी शिक्षणपरक कार्यक्रम संचालित करता है। इस केंद्र के कार्य क्षेत्र मेघालय, त्रिपुरा एवं मिज़ोरम राज्य है।

स्थापना

इस केंद्र की स्थापना जुलाई, 1976 में की गयी थी। किन्ही कारणों से यह केंद्र जून, 1979 में गुवाहाटी स्थानान्तरित कर दिया गया। उस समय इसका कार्यक्षेत्र असम, अरूणाचल, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर, नागालैण्ड एवं त्रिपुरा था। मेघालय राज्य की मांग पर सितंबर 1987 में पुन: इसे शिलांग में प्रारंभ किया गया। इस समय इसे पूर्वोत्तर पर्वतीय विश्वविद्यालय, शिलांग के परिसर में प्रारंभ किया गया और इसका कार्यक्षेत्र मेघालय तथा मिजोरम निर्धरित किया गया। बाद में मणिपुर को भी केंद्र के साथ जोड़ लिया गया। नागालैण्ड—दीमापुर में संस्थान का नया केंद्र स्थापित् होने के पश्चात केंद्र का कार्यक्षेत्र मेघालय, मिजोरम तथा त्रिपुरा कर दिया गया।

उद्देश्य

राज्य में सेवारत हिंदी शिक्षकों के लिए लघुअवधीय नवीकरण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन नवीकरण कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों को भाषाशिक्षण की नवीन प्रविधियों से परिचित कराया जाता है तथा उन्हें मानक हिंदी के प्रयोग के प्रति सतत जागरूक रखने का प्रयास किया जाता है।

अब तक पूर्णकालिक क्षेत्रीय निदेशक

1. डॉ. न. वी. राजगोपालन प्रोफेसर 15.07.1976 से 05.05.1979
2. डॉ. जयकृष्ण विद्याशंकर रीडर 01.05.1979 से 16.06.1979
3. डॉ. सी. ई. जीनी रीडर 07.09.1987 से 23.11.1991
4. डॉ. म. मा. बासुतकर रीडर 27.11.1991 से 13.08.1992
5. डॉ. ठाकुर दास रीडर 13.08.1992 से 24.12.1993
6. डॉ. चतुर्भुज सहाय प्रोफेसर 07.04.1984 से 30.04.1988
7. डॉ. ललित मोहन बहुगुणा रीडर 12.09.1994 से 01.05.1997
8. डॉ. मीरा सरीन प्रवक्ता 01.05.1997 से 08.06.1998
9. डॉ. प्रमोद कुमार शर्मा रीडर 09.06.1998 से 15.07.2001
10. डॉ. हेमराज मीणा रीडर 15.07.2001 से 15.07.2002
11. डॉ. श्रीशचंद्र जैसवाल प्रोफेसर 15.07.2002 से 23.09.2003
12. डॉ. रवि प्रकाश गुप्त प्रोफेसर 23.09.2003 से 30.09.2004
13. डॉ. विद्याशंकर शुक्ल रीडर 01.10.2004 से अबतक

संपर्क स्थल


लोवर लाच्छुमियर, शिलांग, 793014 (मेघालय)
दूरभाष: 0364-227097
फैक्स: 0364-2227097

 कार्यक्षेत्र

मेघालय, मिज़ोरम व त्रिपुरा राज्य

पाँच दिवसीय हिंदी अधिगम कार्यशाला


(दिनांक : 14.09.09 से 18.09.09 तक)
प्रतिवेदन

  • केंद्रीय हिंदी संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र: शिलांग द्वारा केंद्र सरकार के कार्यालयों के खासी एंव गारो कर्मचारियों (नराकास से संबद्ध) के लिए पाँच दिवसीय ‘हिंदी अधिगम कार्यशाला’ का आयोजन दिनांक 14.09.09 से 18.09.09 तक संस्थान परिसर में किया गया।
  • कार्यशाला का उद्घाटन दिनांक 14.09.09 को 11:00 बजे हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में श्री लाबोर मालड़याग, डिप्टी सी.ई.एम., के.एच.ए.डी.सी., शिलांग उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. विवेक श्रीवास्तव, हिंदी विभाग, नेहू ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. एस. लामारे, वरिष्ठ प्रवक्ता, खासी विभाग, सेंट एडमंड कॉलेज एवं श्री एच. एन. त्रिवेदी, सहा. निदेशक, हिंदी शिक्षण योजना (गृह मंत्रालय, भारत सरकार), शिलांग उपस्थित रहे।
  • सर्वप्रथम केंद्रीय हिंदी संस्थान, शिलांग केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक प्रो. विद्याशंकर शुक्ल ने अतिथियों का स्वागत किया। इसके उपरांत प्रतिभागियों ने अपना परिचय दिया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती एस. जीन. ड्खार ने किया।
  • उद्घाटन सत्र के पहले 26 प्रतिभागियों का पंजीकरण हुआ। अध्यापन कार्य डॉ. अशोक मिश्र, डॉ. विद्याशंकर शुक्ल, केंद्रीय हिंदी संस्थान, डॉ. के. एम. मिश्र, हिंदी शिक्षण योजना, राजभाषा विभाग, शिलांग (गृह मंत्रालय, भारत सरकार), डॉ. आलोक दीपक उपाध्याय, श्रीमती एस.जीन ड्खार और सुश्री मारकोर शीशा ड्खार, शिलांग (सभी अतिथि अध्यापक) द्वारा किया गया। सुश्री मारकोर शीशा ड्खार ने प्रतिभागियों को कम्प्यूटर पर हिंदी का प्रशिक्षण भी दिया।
  • दिनांक 18.09.09 को प्रतिभागियों का परीक्षण लिया गया, जिसमें उनकी प्रगति और परीक्षा फल उत्साहजनक और हिंदी सीख जाने की दिशा में अग्रसर रहा। परीक्षोपरान्त परिणाम में क्रमश श्रीमती जेवेवी वाहलाड़, प्राथमिक शिक्षिका, केंद्रीय विद्यालय, हैप्पी वैली, शिलांग, श्री माईकल मजाव, ल.श्रे.लिपिक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, उमियाम, मेघालय, श्रीमती मीपिली नाड़किनरी, प्राथमिक शिक्षिका, केंद्रीय विद्यालय, हैप्पी वैली, शिलांग प्रथम, द्वितीय, तृतीय रहीं। इन प्रतिभागियों को पुस्तकें भेंट कर पुरस्कृत किया गया।
  • कार्यशाला का समापन समारोह 3:00 बजे अपराह्न को हुआ। इस अवसर पर श्रीमती एन.शङाप, केंद्र निदेशक, आकाशवाणी, शिलांग मुख्य अतिथि रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती हेप्पी बलाह, भूतपूर्वक संयुक्त शिक्षा सचिव, मेघालय सरकार ने की। विशिष्ट अतिथि प्रो.(श्रीमती) एस, ड्खार, अध्यक्ष, खासी विभाग, नेहू, शिलांग एवं श्री एन.मुनीश सिंह, क्षेत्रीय अधिकार, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद्, शिलांग रहे। मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि एवं अध्यक्ष ने अपने-अपने वक्तव्य में यही संकेत दिया कि केंद्रीय हिंदी संस्थान पूर्वोत्तर में हिंदी के बढ़ावा देने के लिए स्थानीय लोगों के साथ मिलकर कार्य करेगा तभी स्थिति बेहतर होगा। अपनी प्रतिक्रिया में अधिकतर प्रतिभागियों ने कहा कि यह कार्यक्रम हिंदी सीखने का सबसे अच्छा अवसर प्रदान करता है। हिंदी हमारे लिए ज़रूरी है। अन्त में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अशोक मिश्र ने किया।