सोमवार, अप्रै 22

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पूर्व गतिविधियाँ

मुख्यालय, आगरा

सूचना एवं भाषा-प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संयोजित ‘प्रो. रवींद्रनाथ श्रीवास्तव स्मृति प्रसार व्याख्यान-माला’ में “पाठ-विश्लेषण” विषय पर विख्यात भाषाविज्ञानी प्रो. दिलीप सिंह के व्याख्यान

“भाषाई संरचना की विशिष्टता की दृष्टि से साहित्यिक पाठ को परखने की शैलीवैज्ञानिक आलोचना प्रविधि अब पुराने ज़माने की बात है। रचना और सर्जना के बदलते स्वरूप और मानदंडों को ध्यान में रखते हुए भाषा विज्ञान में आज ‘पाठ-विश्लेषण’ की चर्चा की जाती है, जो पिछली पद्धतियों से सुसंगत और व्यापक संदर्भों को समाहित करती है, बल्कि अधिक स्पष्ट एवं संतुलित भी है।” यह वक्तव्य है दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, चेन्नई के उच्च-शिक्षा एवं शोध संस्थान से पधारे विख्यात भाषाविज्ञानी प्रो. दिलीप सिंह का । प्रो.सिंह केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा हिंदी भाषा के शिक्षण-प्रशिक्षण की गुणात्मक रूप से संवर्धित करने के उद्देश्य से केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के सूचना एवं भाषा-प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संयोजित ‘प्रो. रवींद्रनाथ श्रीवास्तव’ स्मृति प्रसार व्याख्यान माला (दिनांक : 7-8 फरवरी, 2008 ) में पाठ विश्लेषण विषय पर अपना व्याख्यान देने के लिए आए हुए थे। तीन व्याख्यानों की इस श्रृंखला में प्रो. सिंह ने कविता के संदर्भ में पाठ विश्लेषण की तकनीक और प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा करते हुए दूसरी पाठ-आलोचना पद्धतियों के साथ इसकी तुलना की और विद्यार्थियों को इसके स्वरूप एक कार्यसाधक उपकरणों की जानकारी दी। प्रो. सिंह ने अलग- अलग रचनाकारों की कुछ कविताओं और कहानियों के पाठ-विश्लेषण करके दिखाया। प्रो. सिंह के व्याख्यान से पूर्व सूचना एवं भाषा-प्रौद्योगिकी विभाग की समन्वयक डॉ. ज्योत्स्ना रघुवंशी ने आगंतुक अतिथियों का स्वागत किया। अध्यापक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. रामकमल पांडेय ने सभागार में उपस्थित लोगों से प्रो. दिलीप सिंह का परिचय कराया। इसके उपरांत प्रो. रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव के व्यक्तित्व और कृतित्व पर अपना संक्षिप्त आलेख प्रस्तुत करते हुए सूचना एवं भाषा प्रौद्योगिकी विभाग के प्रवक्ता श्री केशरीनंदन ने उनकी गहन भाषा विश्लेषण दृष्टि और उदार रचनाशील प्रवृत्ति का उल्लेख किया। प्रो. दिलीप सिंह के व्याख्यान के उपरांत प्रश्न एवं चर्चा सत्र में सभागार में उपस्थित शिक्षकों एवं शिक्षार्थियों ने सक्रिय सहभागिता दिखाई। कार्यक्रम के अंतिम चरणों में अध्यक्षीय उद्‍बोधन देते हुए निदेशक प्रो. शंभुनाथ ने कहा कि कोई भी रचना गठनात्मक अथवा संप्रेषणात्मक दृष्टि से अपने भाषाई एवं भाषेत्तर संदर्भों से पूर्णतः अलग करके नहीं देखी जा सकती। पाठ की स्वायत्तता का अर्थ अपने समय और परिवेश के दवाबों और ज़रूरतों से हटकर ग्रहण करना रचना के समयबोध और सौंदर्यबोध को कमतर करना है। कार्यक्रम के अंत में डॉ. ज्योत्स्ना रघुवंशी के व्याख्यान में सहयोग और सहभागिता करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापन किया। संचालन अनुपम श्रीवास्तव ने किया।

चीन में हिंदी शिक्षण के प्रति बढ़ती लोकप्रियता

"भारत-चीन के बढ़ते व्यापारिक संबंधों के परिप्रेक्ष्य में चीनी विद्यार्थियों के लिए हिंदी शिक्षण को बढावा देना चाहिए इससे भारत-चीन के परंपरागत सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूती मिलेगी।" यह बात संस्थान के निदेशक प्रो.शंभुनाथ ने चीन के पेकिंग विश्वविद्यालय से आए छः सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई मुलाकात के दौरान कही। मुलाकात में चीन के हिंदी अध्यापकों के उच्च प्रशिक्षण और चीन में हिंदी की बढ़ती हुई लोकप्रियता पर चर्चा हुई। इस अवसर पर चीनी प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा का संदर्शन किया और यहाँ चलने वाली शिक्षण-प्रशिक्षण गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पेकिंग विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रो.जेड.एच.चांग गुओयू तथा हिंदी के विभागाध्यक्ष प्रो.जियांग जिंगकुई कर रहे थे। वार्ता में केंद्रीय हिंदी संस्थान की तरफ से निदेशक के साथ प्रो. अश्वनीकुमार श्रीवास्तव और प्रो.श्रीशचन्द्र जैसवाल भी मौजूद थे। प्रो.जेड.एच.चांग गुओयू ने प्रस्ताव रखा कि चीन के विद्यार्थियों और शिक्षकों को हिंदी शिक्षण से चीन में हिंदी के प्रचार-प्रसार को बल मिलेगा, जिसकी वहाँ बडी़ आवश्यकता है। प्रो.शंभुनाथ ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि यदि चीन अपने देश के हिंदी शिक्षकों को अपने व्यय पर उच्च प्रशिक्षण के लिए भेजता है तो केंद्रीय हिंदी संस्थान उन्हें प्रशिक्षित करने का दायित्व वहन करेगा। संस्थान चीन में अपने शिक्षक अल्पावधि के लिए भेजने पर भी विचार कर सकता है। प्रो.जियांग जिंगकुई ने अनुरोध किया कि चीन के कुछ अधिक छात्रों को आगरा में पढा़ने के लिए संस्थान की ओर से छात्रवृत्ति मिलनी चाहिए। पेकिंग विश्वविद्यालय और केंद्रीय हिंदी संस्थान के प्रतिनिधि सदस्यों के बीच बहुत सौहार्दपूर्ण बात हुई एवं इस बातचीत के आधार पर आगे कार्य करने के लिए एक संयुक्त-सहमतिपत्र (एम.ओ.यू.) बनाना तय हुआ।

दीक्षांत समारोह- अंतर्राष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग

"केंद्रीय हिंदी संस्थान के अंतर्राष्ट्रीय बिद्यार्थी संस्थान से लौटते समय अपने साथ केवल कुछ महीनों का हिंदी प्रशिक्षण और एक उपाधिभर लेकर नहीं जाते बल्कि वे हिंदी की विश्वबंधुता और समरसता का वह संदेश लेकर भी जाते हैं जो सदियों से भारतीय संस्कृति का मूल स्वर रहा है।" ये उद्गार हैं संस्थान के अंतर्राष्ट्रीय हिंदी भाषा शिक्षण विभाग के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे आगरा के जिला अधिकारी श्री संजय प्रसाद के श्री संजय प्रसाद संस्थान के विदेशी विद्यार्थियों की हिंदी दक्षता और गहरी सांस्कृतिक अभिरुचि को देखकर प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके। संस्थान के इस दीक्षांत समारोह के साथ ही साथ बिद्यार्थियों का पूरा परीक्षा परिणाम घोषित कर उन्हें उपलब्ध कराया जाना इस बार की बिशेष उपलब्धि रही। दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के माननीय उपाध्यक्ष प्रो. रामशरण जोशी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में सभी छात्रों के सुखद और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि ये विद्यार्थी निश्चित रूप से हिंदी की विविधता और समृध्ता के क्रिया सहगामी बनकर अपने-अपने क्षेत्र में हिंदी के सांस्कृतिक दूत के रूप में भूमिका निभाएँगे। कार्यक्रम का आरंभ परंपरानुसार सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात संस्थान के वरिष्ठ शैक्षिक सदस्यों ने आगंतुक अतिथियों का पुष्पहारों के साथ स्वागत किया।